
जाति व्यवस्था, कर्मकांड, छुआछूत, मूर्ति पूजा एवं तीर्थ व्रत आदि के प्रखर विरोधी थे संत रविदास: श्याम भारती।
दरभंगा: रविवार को बहादुरपुर प्रखंड के देकुली सामुदायिक भवन प्रांगण में दलित शोषण मुक्ति मंच के दरभंगा जिला कमेटी की ओर जिला अध्यक्ष रामप्रीत राम की अध्यक्षता में संत रविदास जयंती मनाई गयी। दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य महासचिव श्याम भारती ने उनके चित्र पर पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि संत रविदास ने बहुजन समाज के लिए ब्राह्मणवाद और मनुवाद से मुक्ति के लिए बगावत किया था। ब्राह्मणवाद, पाखंडवाद और गैर बराबरी के विरुद्ध भी उन्होंने संघर्ष किया। जाति व्यवस्था, कर्मकांड छुआछूत, मूर्ति पूजा, तीर्थ व्रत इत्यादि के भी संत रविदास प्रखर विरोधी थे। उन्होंने कहा कि संत रविदास के उपदेश समाज के कल्याण तथा उत्थान के लिए आज भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। संत रविदास उन महान संतों में अग्रणी थे जिन्होंने अपनी रचना के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राज्य महासचिव ने कहां कि देश की सरकार संविधान को नहीं मान रही है मनुस्मृति लागू करना चाह रही है। सीएए एनपीआर और एनआरसी मुसलमानों दलितों पिछड़ों और गरीबों के खिलाफ हैं देश के बहुसंख्यक को मतदान के अधिकारों से वंचित कर नागरिकता छीनने वाला कानून है। इसीलिए यह काला कानून सरकार अविलंब वापस ले।
एसएफआई के जिला संयोजक नीरज कुमार ने कहा कि भारत में सदियों में एक महान संतों ने जन्म लेकर इस मातृभूमि को धन्य किया है जिसमें गुरु रविदास उन महान संतों में शुमार है आज हम लोग उनके 570 वर्ष बाद भी उनको याद करते हैं। उन्होंने 15 वीं शताब्दी में गरीब दलितों को सामंतवाद के अत्याचारों के खिलाफ समाज
सुधार में अपनी अग्रणी भूमिका निभाई।
इस अवसर पर दलित शोषण मुक्ति मंच के सुशीला देवी, विनोद पासवान मोहम्मद रसूल राजगीर पासवान, रामविलास पासवान, मनोहर शर्मा, रामसुंदर राम, हरिशंकर राम, ललित पासवान, रंजीत पासवान, जीवन पासवान, अशोक महतो एवं राजकुमार महतो आदि ने भी माल्यार्पण किया। इस अवसर पर प्रस्ताव पारित कर सीएए, एनआरसी एवं एनपीआर वापस लेने की माग की गई। बिहार सरकार से विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर इस कानून को लागू नहीं करने की मांग की गई साथ ही इसके खिलाफ किला घाट लाल बाग में चल रहे आंदोलन में एकजुटता जाहिर करते हुए 10 फरवरी को किला घाट में
चल रहे सत्याग्रह में बड़ी संख्या में दलित शोषण मुक्ति मंच की ओर से भागीदारी करने का निर्णय लिया गया।
सीएए एनआरसी एनपीआर के खिलाफ दलित शोषण मुक्ति मंच की ओर से दरभंगा समाहरणालय पर जन सत्याग्रह करने का निर्णय 28 फरवरी को लिया गया।

