
शोध के लिए दृष्टि जागृत होना आवश्यक : रामाशीष।
दरभंगा: प्रज्ञा प्रवाह के उत्तर भारत के संयोजक समाजिक चिंतक रामाशीष ने कहा कि शोध की पद्धति के साथ दृष्टि भी जागृत होनी चाहिए। तभी शोध संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि आचार्य बंदी का संवाद हो या याज्ञवल्क-गार्गी का शास्त्रार्थ, सबमें शोध के सूत्र निहित हैं। वह आज ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में सामाजिक विज्ञान में शोध पद्धति विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति अद्वितीय है, पश्चिम से तो बिल्कुल अलग है। इसलिए यहां होने वाले शोध को यहां के दृष्टि से देखना चाहिए, न कि पश्चिम के चश्मे से। मिथिला के ज्ञानियों ने भारत के पुरूषार्थ को विश्व भर में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र विश्व में सबसे पहले भारत में ही था, इसका जीता-जागता उदाहरण लिच्छवी गणराज है। उन्होंने कहा कि हम चाणक्य की जगह अरस्तु, प्लेटो आदि को पढ़ते हैं। जबकि चाणक्य तक्षशिला के राजनीतिशास्त्र के आचार्य थे। उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा की पहचान कैसे की जाती है। इसका जीता जागकता उदाहरण चंद्रगुप्त मौर्य है। इस मौके पर पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री संजय पासवान ने कहा कि हर स्तर पर और विद्या में शोध आवश्यक है, इसलिए शोध को सरल, सुगम और सुलभ बनाना जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध का केन्द्र बनाएं जाने की आवश्यकता है। आज से 10 वर्ष पूर्व शोध का स्तर बहुत ही ऊपर था। जो आज बहुत नीचे आ गया है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. रविप्रकाश पांडेय ने कहा कि शोध करते समय शोधार्थी जितना संवेदनशील होगा, शोध का स्तर उतना ही अच्छा होगा। सामाजिक विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष और कार्यशाला के निदेशक प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि 10 दिनों तक चलने वाले इस कार्यशाला में देश भर के समाज विज्ञान के 15 विशेषज्ञ शोध पद्धति के विभिन्न आयामों पर अपनी विवेचना प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. लक्ष्मी कुमारी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सारिका पांडे ने किया। कार्यशाला के दो शैक्षणिक सत्र रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के प्रो. सीएसएस ठाकुर द्वारा संचालित किया गया। वहीं इस अवसर पर डॉ. गोपीरमण सिंह द्वारा शोध के पद्धति और आयामों पर लिखे गये एक पुस्तक का विमोचन किया गया।

