
नगर विधायक द्वारा सरकारी राशन वितरण मामले में गामी ने जिला प्रशासन पर उठाये गम्भीर सवाल।
दरभंगा: हायाघाट के जदयू विधायक अमरनाथ गामी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिला प्रशासन पर बड़ा सवाल उठाया है। नगर विधायक संजय सरावगी द्वारा वितरित करवाये जा रहे राशन के सरकारी बोरे में होने की खबर वायरल होने और सूचना मिलने पर भी जिला प्रशासन द्वारा संज्ञान न लेने पर गम्भीर सवाल उठाए हैं। हालांकि उन्होंने इसकी लिखित शिकायत भी जिलाधिकारी से करके जांच कर कारवाई की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ इस सरकारी राशन मिलने की घटना को उन्होंने नगर विधायक द्वारा डीलर की बैठक बुलाने से जोड़कर भी गम्भीर सवाल किये हैं। उन्होंने कहा कि कोई विद्यायक डीलरों की बैठक कैसे कर सकता है! अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डीलर की बैठक करना और इसके बाद सरकारी राशन के बोरे का राहत वितरण में मिलना, कहीं न कहीं बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करती है।
इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए श्री गामी ने बताया कि नगर विधायक द्वारा जनता में बीच राहत वितरण केलिए राशन का पैकेट तैयार करवाने की तस्वीर वायरल हुई जिसमें स्पष्ट रूप से सरकारी राशन का बोरा नजर आ रहा है। वायरल होने के बाद उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी को पूरे मामले से फोन पर अवगत करवाया और व्हाट्सएप पर मामले से सम्बंधित तस्वीरे भी भेजी। इसके वाबजूद जिलाधिकारी द्वारा जाँच करवाने केलिए लिखित शिकायत की मांग करना, अपने आप मे एक गम्भीर विषय है। श्री गामी ने कहा यदि किसी सामान्य व्यापारी के यहाँ सरकारी राशन का बोरा मिलता तो तुरंत छापेमारी और कारवाई हो जाती, पर यहां खुलेआम दिख रहा है, फिर भी जाँच केलिए भी लिखित शिकायत मांगी जा रही है। आखिर सामान्य व्यापारी और रसूखदार केलिए कानून दो तरह से कार्य करता है क्या!
श्री गामी ने कहा कि वायरल होने के बाद फेसबुक पोस्ट से उक्त फ़ोटो को हटाना भी संदेह उतपन्न करता है। आखिर दाल में काला नही था तो फ़ोटो हटाया क्यों गया! अगर सबकुछ सही था तो रहने देते।
श्री गामी ने कहा कि स्पष्ट है कि सरकारी राशन के बोरे को पलटी कर भी उपयोग कर सकते, पर यहां सील्ड पैक बोरा है जिस पर सील का पेपर भी दिख रहा है। यह अनाज कहाँ से आया, इसपर जिला प्रशासन को जांच कर अविलम्ब कारवाई करनी चाहिए।
श्री गामी ने कहा कि ऐसे में यदि सरकारी राशन दिख रहा है तो किसी न किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है। यदि नगर विधायक ने जानबूझ कर गबन नही करवाया है तो यह राशन उन्होंने जिससे लिया है, उसका नाम बताये। यदि नगर विधायक निर्दोष हैं तो कोई न कोई सरकारी कर्मी दोषी है। ऐसे में इस मामले की शीघ्र जांच कर कारवाई जरूरी है। तभी जनता में जिला प्रशासन पर विश्वास कायम हो सकेगा कि प्रशासन आम और खास केलिए दो तरह के नियम नही बनाती।
हालांकि सोशल मीडिया में वायरल होने और सूचना मिलने के बाद भी कारवाई के प्रति जिला प्रशासन का टालमटोल वाला रवैया कहीं न कहीं जांच के परिणाम को इंगित करता जरूर नजर आता है। एक तरफ जहां सदर एसडीओ जहां इनदिनों डीलरों के खिलाफ शिकायत मिलने पर तुरंत जांच कर दनादन कारवाई करते दिख रहे हैं, वहीं इतने बड़े मामले पर मुंह मूंदे रहना भी मुँह पर किसी बड़े स्तर के टेप लगे होने की तरफ भी इशारा जरूर करते हैं। ऐसे में अब देखने वाली बात होती है कि जिला प्रशासन केलिए आम और खास केलिए कारवाई का तरीका अलग होता है और इसी के तहत इस मामले को उम्मीद अनुरूप ठंढ़े बस्ते में डाल दिया जाता है, अथवा आम हो या खास, सबके लिए कानून एक सा काम करेगा, इसका उदाहरण प्रस्तुत किया जाता है।

