Home Featured पशुपालकों की फरियाद पर डीएम ने लिया संज्ञान, पटना से आकर टीम ने किया पशुओं का स्वास्थ्य सर्वेक्षण।
Featured - मुख्य - April 19, 2020

पशुपालकों की फरियाद पर डीएम ने लिया संज्ञान, पटना से आकर टीम ने किया पशुओं का स्वास्थ्य सर्वेक्षण।

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दरभंगा: वैसे तो दरभंगा के जिलाधिकारी डॉ0 त्यागराजन एसएम की कीर्ति गाथा जनहित के कार्यो में लगातार देखने एवं सुनने को मिलती ही रहती है। पर जब समय आपदा-विपदा का हो तो इसमें जिलाधिकारी की सक्रियता और गंभीरता अपेक्षाकृत ज्यादा ही देखने को मिलती है। कोरोना महामारी के कारण देश भर में लॉक डाउन है। लोगों की परेशानियां भी बढ़ गयी हैं। सारा प्रशासनिक तंत्र सक्रिय है। पर सबसे बड़ी बात, दरभंगा की जनता केलिए जिलाधिकारी स्वयं पूरी तरह सक्रिय हैं और किसी भी जनहित के कार्यो पर संज्ञान ही नही लेते बल्कि पूरा समाधान करते हैं, वह भी नियत समय सीमा में।
ऐसा एक बड़ा उदाहरण पुनः देखने को मिला जब जिलाधिकारी के संज्ञान में आते ही पशुपालकों की समस्या को दूर करने डॉक्टरों एवं विशेषज्ञों की टीम लगातार क्षेत्र में भ्रमण एवं पशुओं के इलाज तथा जांच आदि में जुट गयी।
दरअसल, हनुमाननगर प्रखण्ड के सिनुआरा निवासी पशुपालक कृष्णकांत चौधरी की गाय को गुरुवार के सवेरे से तेज बुखार था। उन्होंने स्थानीय निजी डॉक्टर से संपर्क किया। निजी डॉक्टर द्वारा इलाज के बाद भी स्थिति नही सुधरी तो डॉक्टर ने एफएमडी (खुर पका – मुंह पका) संक्रमण की आशंका जतायी। श्री चौधरी ने प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी को संपर्क किया तो उन्होंने लॉकडाउन का हवाला देते हुए आने से इनकार कर दिया और अब जून में भी भेंट होने का नाम कह दिया। इस बीच श्री चौधरी ने उक्त समस्या परिचित डॉ0 अजय चौधरी को बताया। उन्होंने इसे जिलाधिकारी के संज्ञान में दिया। बस फिर क्या था, शुक्रवार को ही शाम में डॉक्टर की टीम कृष्णकांत चौधरी के घर पहुंच कर देर रात तक इलाज में लगी रही। गाय की हालत थोड़ी सुधरी। अगले दिन शनिवार को जिला पशुपालन पदाधिकारी प्रेम कुमार झा डॉक्टरों की टीम के साथ पहुँचे और हाल चाल जानने के बाद आसपास के इलाकों में भी पशुपालकों से बात की और उनके पशुओं के विषय मे जाना। बगल के पंचायत थलवारा में भी लोग एफएमडी की आशंका से परेशान थे। डॉक्टरों की टीम ने वहाँ भी सर्वे किया। देर शाम पूरी टीम इलाके में सर्वे करती रही। इसी बीच जिला पशुपालन पदाधिकारी को सूचना मिली कि पटना से भी टीम सर्वेक्षण केलिए आ रही है। इस सूचना के बाद पशुपालक को लॉक डाउन का हवाला देने वाले प्रखण्ड चिकित्सा पदाधिकारी की हवा निकल गयी। रविवार की सुबह पटना की टीम के आने से पूर्व शिकायतकर्ता कृष्णकांत चौधरी के घर पहुंच गए। उस समय श्री चौधरी अपने खेत मे थे। डॉक्टर ने उनके भाई के सामने अनुरोध करते हुए कहा कि वे पटना से आने वाली टीम के सामने बोल दें कि गत नवम्बर में टीकाकरण हुआ था।
इस बीच रविवार को पशु वैज्ञानिकों की टीम भी पटना से पहुँची। उन्होंने इलाके का सर्वे किया और सैंपल भी साथ ले गए। श्री चौधरी सहित तमाम पशुपालकों ने स्पष्ट रूप से उन्हें बताया कि दो साल पहले टीकाकरण हुआ था। इसके बाद नही हुआ है। टीका का असर छः महीने रहता है। अतः प्रत्येक छः महीने पर टीकाकरण चलाया जाता है, पर ऐसा नही हुआ।
टीम द्वारा लोगों को बहुत सी जानकारियां भी दी गयी। साथ ही उन्हें समझाया गया कि मवेशी के इलाज केलिए सरकारी डॉक्टर से ही सेवा लें। इसपर लोगो ने बताया कि अगर सरकारी डॉक्टर से इलाज और दवा उन्हें मिले तो वे निजी डॉक्टर पर खर्च क्यों करेंगे! उन्हें तो पता नही था कि कौन हैं प्रखण्ड चिकित्सा पदाधिकारी। वो तो आज प्रकट हुए हैं।
इस संबंध जानकारी देते हुए प्रभारी जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ0 प्रेम कुमार झा ने बताया कि जैसे ही उनके संज्ञान में मामला आया, उन्होंने गंभीरता पूर्वक इसे लिया और इलाज शुरु करवाया। हालांकि फिलहाल गाय में एफएमडी का कोई लक्षण नही दिख रहा है। फिर भी पटना से आये वैज्ञानिकों की टीम ने सैम्पल जाँच केलिए लिया है। डॉ0 श्री झा ने कहा कि टीकाकरण छः महीने पर कराया जाता है क्योंकि टीका से पशुओं में छः महीने तक रोग प्रतिरोधक क्षमता रहती है। पिछले साल नवंबर में पूरे जिले में टीकाकरण किया गया था। इस बार पुनः अप्रैल में होना था। परंतु लॉक डाउन की वजह से टल गया।
पटना से आये टीम के सदस्य डॉ0 अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने श्री चौधरी के अलावा आसपास के पशुपालकों के गायों को भी देखा है, सब स्वस्थ हैं। श्री चौधरी के गाय के खुर ने जो छोटे छोटे घाव हैं और बुखार आया, इसी कारण इन्हें आशंका हुई। परंतु प्रथम दृष्टया एफएमडी के लक्ष्मण नही लगते हैं। फिर उन्होंने सैम्पल साथ ले लिया है। साथ ही डॉ0 कुमार ने लोगो से अपील करते हुए कहा कि जैसे ही टीकाकरण शुरू हो, सभी सक्रिय होकर टीकाकरण करवाएं। इस बात का ध्यान रखें कि एक भी पशु नही छूटे। क्योंकि यह संक्रामक रोग है और यदि एक भी पशु छूट गया तो सुरक्षा चक्र टूट जाएगा।
शिकायतकर्ता पशुपालक कृष्णकांत चौधरी सहित तमाम पशुपालकों ने दरभंगा के जिलाधिकारी को कोटि कोटि धन्यवाद देते हुए आभार प्रकट किया। साथ ही उन्होंने आग्रह भी किया कि अभी एफएमडी का सीजन है और यह संक्रामक रोग है। अतः लॉक डाउन में भी टीकाकरण जरूर करवा दें क्योंकि उनके इलाके में दो साल से टीकाकरण नही हुआ है।

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