
जर्जर भवन में खतरे में दर्जनों महादलित परिवार की जान, फिर टला एक बड़ा हादसा।
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दरभंगा: लगातार टूट टूटकर खंडहर बनते जा रहे महादलित बस्ती में बिहार सरकार के स्लम योजना से बने 56 कमरे के मकान में दर्जनों महादलित परिवारों की जान चौबीस घण्टे खतरे में है। एक साल पूर्व हुए हादसे में कुछ लोग घायल भी हुए थे। वहीं गुरुवार की सुबह भी एक बड़ा हादसा होते होते बचा है। स्थानीय लोगों एवं प्रतिनिधियों का सीधा आरोप है कि लगातार शिकायतों के बाद भी निगम प्रशासन और जिला प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार रहा है।
दरअसल मामला शहर के वार्ड 46 में कबिलपुर रैक पॉइंट के निकट 1999 में बिहार सरकार द्वारा स्लम योजना अंतर्गत महादलित टोला में बनाये गए 56 कमरों के दो मंजिले भवन का है। गुरुवार की सुबह करीब 5 बजे मकान में सोए लोग समय हड़बड़ा कर उठे जब उन्हें भूकम्प जैसा एहसास हुआ। बाहर निकल कर देखा तो मकान के ग्राउंड फ्लोर को प्रथम मंजिल से जोड़ने वाला सीढ़ी धरासायी होकर गिर चुका था। अहले सुबह होने के कारण लोग सोए थे और आंगन में या सीढ़ी पर किसी के नही होने के कारण कोई बड़ा हादसा टल गया।
स्थानीय लोगो ने बताया कि तरह का हादसा कोई नयी बात नही है। इस भवन में कभी छज्जे का टूट कर गिरना तो कभी छत के हिस्से का टूटना आदि होते रहता है। जब से मकान बना तब से कभी एक बार भी मरम्मति नही हुआ।
वार्ड 46 के वार्ड पार्षद राजू पासवान ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व छज्जा गिरने से कई लोग घायल हुए थे। सबको हॉस्पिटल भी पहुंचाया गया था। निगम से अधिकारी भी आये थे। निरीक्षण करके रिपोर्ट बना कर गए। नगर विधायक को भी बुलाकर स्थिति दिखायी गयी थी। डीएम को भी आवेदन दिए थे। पर कुछ नही हुआ। आज के हादसे ने इन गरीब महादलितों की मुसीबत और बढ़ा दी है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और न जाने कितने लोगों के जान माल का नुकसान हो सकता है।
स्थिति को देखते हुए निश्चित रूप अब सबकी उम्मीद
दरभंगा के जिलाधिकारी डॉ0 त्यागराजन एसएम की ओर है। लॉक डाउन में भी जन हितैषी कार्यो में एक्शन लिया है, उम्मीद की जा सकती है कि इसपर बड़े हादसे को आमंत्रित कर रही स्थिति पर भी त्वरित संज्ञान लेते हुए कारवाई की जाएगी और इन गरीब महादलितों को असमय काल के गाल में जाने से बचाया जा सकेगा।

