
घरों में अदा की गयी अलविदा की नमाज, इमाम के साथ चार-पांच लोगों ने ही मस्जिद में अदा की नमाज।
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दरभंगा: माहे रमजान के चौथा व अंतिम अलविदा जुमा की नमाज जिले के विभिन्न प्रखंड क्षेत्र एवं शहरी क्षेत्र में अकीदत के साथ अल्लाह के बंदे व रोजेदारों ने लॉक डाउन का पालन करते हुए अपने अपने घरों में सोशल डिस्टेंस के साथ अदा की।अलविदा जुमा की नमाज को लेकर आज सुबह से ही मुसलमान भाई बहन व बच्चियां घर आंगन साफ सफाई व रंगरोगन में लगे हुए थे। वही मस्जिदों में इमाम मोअज्जिन व रवादिम ने ही नमाज पढ़ी। बाकी सभी लोगों ने अपने-अपने घरों में नमाज अदा की। सबों ने कोरोना से दुनिया को बचाने की दुआ मांगी।
मुस्लिम मौलनानाओ ने कहा कि रोजा से मोहब्बत करने वालों को रमजान के विदा होने पर बेहद अफसोस हो रहा होगा कि पता नहीं हम में से कौन सा शख्स फिर इस पाक मुकद्दस महीना पा सकेगा अथवा नहीं। उन्होंने जकात सदका ए फित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जकात इस्लाम – ए – दीन के लिये एक अहम रुकन है। अल्लाह पाक ने मालदारों पर जकात फर्ज किया है। जकात से इंकार करने वाला फासिक और गुनाहगार है , व कयामत के दिन बहुत बड़ी सजा का हकदार होगा। हदीश के हवाले से उन्होंने आगे बताया कि सोना , चांदी रखने वाला अगर इसका जकात न निकाले तो कयामत के रोज सजा देने के लिये सोने व चांदी की तख्तियां बनाई जायेगी , फिर उनको दोजख ( नर्क ) की आग में तपाकर पसलियों के , पेशानी तथा पुश्त पर रखी जायेंगी। आगे उन्होंने सदका ए फित्र पर जानकारी देते हुए कहा कि जकात पर गरीब – मिस्कीनों का हक है। जिसके पास साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़ेसात तोला सोना या इतनी ही मिलकियत का मलिक हो। माल की मिकदार का चालिसवां हिस्सा यानि ढाई प्रतिशत राशि गरीबों , मिस्कीनों , यतीमों में तक्सीम (बांटे ) कर दिया करे। क्योंकि इस माल पर केवल इन्हीं का हक है। वहीं सदका ए फित्र हर साहब ए नसाब पर वाजिब है। उन्होंने आगे कहा कि ये सदका घर के तमाम मर्द औरत , बूढ़े बच्चे , जवान , खादिम , खादिमा ( नोकर ) की तरफ से वाजिब और जरुरी है।
आगे बताया फितरा की रकम न अदा करने वाले का रोजा जमीन व आसमान के बीच मुअल्लक ( लटकता ) रहता
है।बहरहाल रमजान अब खात्में की ओर है। लोग ईद की तैयारी में मशगुल नजर आ रहे हैं। ऐसे में वे ऊपर वाले से दुआ करेंगे कि इस मुल्क और दुनिया को कोरोना से बचाएं।

