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Featured - मुख्य - July 25, 2020

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए पशुचारा की व्यवस्था करना बना बड़ी चुनौती।

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दरभंगा: जिले में लगातार हो रही बारिश ने आम जनजीवन समेत पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। पशुपालकों के लिए पशुचारा की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। बारिश व बाढ़ के पानी के कारण पशुचारा वाला क्षेत्र जलमग्न हो चुका है। पशुपालकों को कहीं भी हरयाली नहीं दिख रहा है। जिसका इस्तेमाल पशुचारा के रूप में किया जा सके। वहीं, कोरोना, लॉक डाउन, महंगाई आदि की वजह से जमा पूंजी भी खत्म होने के कगार पर है। ऐसे में परिवार के भोजन की व्यवस्था करें कि बाजार से पशुचारा खरीद कर पशुओं का भारण पोषण करें, समझ में नहीं आ रहा है।
वहीं, प्रशासन की ओर से भी किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिल रहा है। पशुपालकों का कहना है कि जब से कोरोना आया है तब से परिवार चलाने का एकमात्र जरिया दुध ही रह गया था। लेकिन बीते कुछ दिनों से जारी झमाझम बारिश ने प्राकृतिक पशुचारा को बर्बाद कर दिया है। पशुचारा नहीं मिलने के कारण दुधारू पशुओं के दुध देने की औसत लगातार कम हो रही है। कई पशुओं ने तो चारा के अभाव में  दुध देना बंद कर दिया है। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों को पशुपालकों की समस्या पर भी ध्यान देना चाहिए।
हनुमान नगर के सिनुआरा निवासी कृष्णकांत चौधरी ने कहा कि सरकार प्राकृतिक आपदा के दौरान जैसे मनुष्यों को भोजन के लिए सामग्री उपलब्ध करवाती है, उसी तरह पशुओं के लिए चारा की भी व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि अन्य जरूरत की सामग्री के लिए हमें किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। जब से कोरोना आया है तब से लगभग सभी कार्य ठप है। एक एक रुपए के लिए परेशान बने हुए है। ऐसे में पशुपालकों केलिए जीविका का एक मात्र साधन दूध ही था। जो चारा के अभाव में बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। पशु पालन विभाग के अधिकारी ने बताया कि बाढ़ के कारण पशु पालको को अपने पशुओं के साथ किसी कैंप में शरण लेना पड़ता है। इस परिस्थिति में विभाग को उस कैंप में जाकर पशु चारा मुहैया कराने का प्रावधान है। वर्तमान की परिस्थिति से विभाग के वरीय अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई मदद नहीं मिलने पर पशुपालकों की परेशानी बढ़ी हुई है।

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