Home Featured विकास की राजनीति के नाम पर मेयर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव।
Featured - मुख्य - August 17, 2020

विकास की राजनीति के नाम पर मेयर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव।

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दरभंगा: दरभंगा नगर निगम में कई पार्षद विकास केलिए तड़प रहे हैं, पर मेयर उन्हें जनता एवं वार्ड का विकास कार्य करने देने में बाधक बन रही हैं शायद। इसलिए विकास की राजनीति के नाम पर मेयर बैजंती देवी खेड़िया के खिलाफ नगर निगम पार्षदों की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लगा दिया गया है। इसी के साथ एक बार फिर निगम की राजनीति गरम हो गई है। नाराज पार्षदों के खेमे ने मेयर पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने नगर निगम को फुटबॉल के गोल की तरह इस्तेमाल किया है। उनके पति का हस्तक्षेप निगम के कार्यों में होता है। कई इस तरह के कार्य किए गए हैं, जिसका प्रतिकूल प्रभाव निगम की मर्यादा पर पड़ा है। घोटाला और मनमानी का आलम यह रहा है कि जांच के बाद भी कार्रवाई शून्य है। हालांकि मेयर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी आरोपों का जवाब सदन में दिया जाएगा। पार्षदों के निर्णय की सूचना है। जल्द ही तिथि निर्धारित की जाएगी।
सोमवार को निगम के प्रशासनिक कार्यालय को सौंपे गए आवेदन में पार्षदों ने कहा है कि मेयर के कार्यकाल में लगातार घोटाला हो रहा है। डीजल घोटाला के संबंध में जांच समिति की रिपोर्ट आई। लेकिन, कार्रवाई शून्य है। इसी तरह शौचालय घोटाला में प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष की गई शिकायत के बाद जांच कराई गई। जांच में सारी बातें सामने आईं। लेकिन, नतीजा कुछ नहीं निकला। हद तो यह कि मेयर दफ्तर आईं नहीं और घर से ही कार्यालय का संचालन करती रहीं। वहीं से फाइल डील करती हैं। आठ महीने से नहीं हुई निगम बोर्ड की बैठक विपक्षी पार्षदों का कहना है कि मेयर ने आठ महीने में निगम बोर्ड की एक भी बैठक नहीं बुलाई। वह अपने धनतंत्र और धमकी तंत्र के सहारे लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही हैं। लोकतांत्रिक पद्धति के तहत अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करनेवाले एक पार्षद को धमकाकर उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर भी ले लिया। पार्षद अपने काम की बदौलत चुनाव जीतकर आते हैं। इनमें से कई राजनीतिक दलों से होते हैं। लेकिन, मेयर का चुनाव दल के आधार पर नहीं होता है। लेकिन, मेयर ने अपने पति के लिए जो विधानसभा चुनाव में एक पार्टी के उम्मीदवार रहे थे। इस बार भी बनने के प्रयास में हैं। उनके लिए निगम को फुटबॉल की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। 2017 में मेयर बनी थीं बैजंती देवी खेड़िया याद रहे कि बैजंती देवी खेड़िया वर्ष 2017 में मेयर बनी। इसके बाद से वह लगातार विकास का दावा कर रही हैं। लेकिन, पार्षदों ने उनपर गंभीर आरोपों को मढ़ा है। इस पर बहस कराने की तैयारी चल रही है। इन सबके बीच जोड़-तोड़ की राजनीति चल रही है। अब देखना यह होगा बहस के दिन ऊंट किस करवट बैठता है। खेड़िया की कुर्सी जाती या फिर वह उसे बचा लेने में कामयाब हो जाती हैं। बता दें कि विपक्षी खेमे का नेतृत्व वार्ड संख्या-21 की पार्षद मधुबाला सिन्हा कर रही हैं। विपक्ष में कुल 48 में से दो दर्जन से अधिक पार्षद खड़े हैं।

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