
छोटी व पहली गलती को ही शक्ति पूर्वक रोकने से यौन उत्पीड़न के मामलों को रोकना संभव: सुमन सिंह।
दरभंगा: यौन उत्पीड़न के मामलों को कराई से रोकना हमें अपने घर से ही प्रारंभ करना चाहिए।अन्यथा पीड़िता सदैव कुंठा, अनजान डर और घबराहट की शिकार हो जाती हैं। अक्सर हम इस तरह के मामलों को लोकलज्जा के कारण दबा देते हैं और किसी न किसी रूप में पीड़िता पर ही प्रतिबंध लगा देते हैं, जिससे अपराध को बढ़ावा मिलता है। यदि छोटी व पहली गलती को ही शक्तिपूर्वक रोका जाए तो यौन उत्पीड़न के मामलों को रोकना संभव है। उक्त बातें सी एम कॉलेज, दरभंगा के महिला कोषांग द्वारा “कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न” विषयक सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से कार्यरत ‘सखी’ संस्था की सचिव सह राज्य समन्वयक सुमन सिंह ने कहा।
विशिष्ट वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय गृह विज्ञान विभाग की प्राध्यापिका डा अपराजिता कुमारी ने कहा कि यदि कोई गलत तरीके से स्पर्श करता है, बोलता है या सोशल मीडिया द्वारा गलत फोटो व संदेश भेजता है तो वह भी यौन उत्पीड़न के अंतर्गत आता है। कार्यस्थल पर भी महिलाओं को पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने में कोई समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने नियमानुसार हर कार्य- स्थल पर यौन उत्पीड़न निवारण कोषांग बनाने तथा सभी सदस्यों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से सर्वसुलभ कराने पर बल देते हुए कहा कि अगर यौन उत्पीड़न की कोई भी शिकायत आए तो उसे तुरंत ही प्राथमिकता पूर्वक एक्शन लेते हुए अपराधी को दंडित करना चाहिए। अन्यथा पीड़िता शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान होकर डर व घबराहट में कोई गलत कदम न उठा ले। कानून के अंतर्गत पीड़िता द्वारा 3 माह के अंदर शिकायत करने का प्रावधान है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि वैसे तो महिलाएं सदैव अपराजिता रही हैं। बस जरूरत है कि सबका मन पवित्र और सदा सुमन बना रहे। हमारा राष्ट्र लोकतंत्र है जो संविधान से चलता है, जहां सब को
सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार है। इसलिए यौन उत्पीड़क अपराधी रूपी राक्षस का दमन आवश्यक है। उन्होंने कहा की पराजीत देवता भी शक्ति रूपा देवी की उपासना कर हर प्रकार के बल प्राप्त करते थे।
कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया, जबकि अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ से हुआ।
विषय प्रवर्तन करते हुए अंग्रेजी विभागाध्यक्ष सह महिला कोषांग के संयोजक प्रो इन्दिरा झा ने महिलाओं के 4 रूपों- माता, पत्नी, बहन और पुत्री की चर्चा करते हुए कहा कि सिर्फ कानून बनाने से ही यौन उत्पीड़न समस्या का निदान नहीं होगा। इसके लिए सामाजिक जागृति तथा नैतिक व आध्यात्मिक उत्थान आवश्यक है। छात्राओं की ओर से जया चौधरी, तथा आतिका बद्र ने विचार रखें। अतिथियों का परिचय कोषांग की सदस्या प्रो रितिका मौर्या ने किया। सेमिनार में मैथिली के छात्र शिवम झा निर्देशित महाविद्यालय की राजनीति विज्ञान की छात्रा पल्लवी द्वारा “निर्भया एकल नाटक” की सराहनीय एवं बेहतरीन प्रस्तुति की।
सेमिनार में प्रो मंजू राय,डा आर एन चौरसिया, योन उत्पीड़न निवारण पोषण के समन्वयक प्रो दिव्या झा, प्रो रागनी रंजन, डा एकता श्रीवास्तव, डा तनिमा कुमारी,डा चंदा कुमारी, डा पुनीता कुमारी, डा रीना कुमारी, डा दिव्या शर्मा, डा नशाफत कमाली, डा रीता दुबे, डा मशरूर सोगरा तथा स्नेहा अग्रवाल सहित 80 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया। स्वागत संबोधन महिला कोषांग की सदस्या प्रो शिप्रा सिन्हा ने किया,जबकि कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डा प्रीति कनोडिया के द्वारा किया गया।

