
जांच प्रतिवेदन में भी रास्ता कब्जा सत्यापित होने पर सीओ ने नहीं की कारवाई, एसडीओ से लगाई गुहार।
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दरभंगा: भूमि विवाद के मामले निपटाने केलिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अक्सर प्रयास करते दिखते हैं। इस केलिए थानाध्यक्ष एवं अंचलाधिकारी को स्थानीय स्तर पर निपटारे केलिए विशेष रूप से जवाबदेही दी गयी है। पर शायद ही छोटा मोटा विवाद भी अंचल एवं थाना स्तर से निपटाया जाता हो। बस कार्यालयों के चक्कर लगाने केलिए पीड़ितों को कागजी कारवाई में उलझा कर रख दिया जाता है।
ताजा मामला बहेड़ी अंचल अंतर्गत बहेड़ी थानाक्षेत्र के हावीडीह गांव का सामने आया है। करीब दर्जन भर परिवारों के घर से मुख्य सड़क को जोड़ने वाले एकमात्र रास्ते को दबंगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। इसी को लेकर सोमवार को महेंद्र साह, भोला साह, जीवछ मंडल, मीना देवी, अंजू देवी, रिंकू मंडल, सरिता देवी आदि सदर अनुमंडल पदाधिकारी के कार्यालय पहुँचे और उन्हें अपनी आपबीती सुनाते हुए इंसाफ की गुहार लगायी।
पीड़ित पक्ष द्वारा बताया गया कि उनके घर के रास्ता को स्थानीय निवासी हरेराम मंडल ने दबंगता दिखाते हुए घेर लिया है और उसपर मकान निर्माण का प्रयास किया जा रहा है। इसको लेकर थाना एवं अंचल से लेकर एसडीओ तथा जिलाधिकारी कार्यालय तक इन्होंने गुहार लगायी। पर महीनों बीतने पर केवल कागज एक जगह से दूसरे जगह घूमता रहा। कोई समाधान नही मिला। इन परिवारों का सौ वर्षों से अधिक से चला आ रहा रास्ता बंद हो गया है। कोई दूसरा रास्ता भी नही है। किसी प्रकार दूसरों के
आंगन आदि से निकल पाते हैं, पर जिनके आंगन से निकलते हैं, वह भी ज्यादा समय नही निकलने देते। कभी कोई आपातकालीन स्थिति आयी तो इन परिवारों के लोग घर से निकल कर कहीं जा भी नही सकते।
पीड़ितों द्वारा जो कागजात प्रस्तुत किये गए, उसके अनुसार इस संबंध में एसडीओ के निर्देश के बाद अंचलाधिकारी द्वारा कर्मचारी के माध्यम से जांच भी कराया गया। जांच प्रतिवेदन में कर्मचारी ने भी पीड़ित पक्ष के आरोप को सही बताया है। साथ ही कब्जा करने वाले हरेराम मंडल का पक्ष भी दर्शाया गया है, जिसमे हरेराम मंडल ने उक्त जमीन को निजी जमीन बताया है। इस प्रतिवेदन को कर्मचारी द्वारा अंचलाधिकारी को भेजा गया। पुनः अंचलाधिकारी द्वारा इसे सदर एसडीओ को अग्रसारित किया गया। आवेदनों एवं प्रतिवेदनों को केवल घुमाया गया, पर कोई समाधान आजतक नहीं निकाला गया।
ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि अंचल, थाना, एसडीओ एवं डीएम कार्यालय आदि सभी आवेदनों एवं प्रतिवेदनों को अग्रसारित ही करते रहेंगे तो पीड़ितों की समस्या का समाधान आखिर कौन करेगा!

