Home Featured साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी के स्मृति दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन।
Featured - मुख्य - September 7, 2021

साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी के स्मृति दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन।

दरभंगा: साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी के स्मृति दिवस के अवसर पर मंगलवार को लनामि विवि के पीजी हिंदी विभाग में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र साह ने कहा कि उनके शोध का विषय बेनीपुरी जी से सम्बंधित रहा है। उन्होंने कहा कि बेनीपुरी सही मायने में योद्धा साहित्यकार रहे हैं। आजादी के आंदोलन में बेनीपुरी जी जैसे साहित्यकारों की अहम भूमिका रही है। समाजगत परिवेश और परिस्थिति ही तब ऐसी थी कि उस जमाने में कई कालजयी साहित्यकारों का उदय हुआ। समाजवादी विचारधारा से ओत-प्रोत उनकी लेखनी निरंतर पूरी सार्थकता के साथ जीवन पर्यंत प्रतिबद्ध रही। हजारीबाग सेंट्रल जेल में रहते हुए उन्होंने प्रसिद्ध नाटक ‘आम्बपाली का सृजन किया। जेल में ही रहते हुए उन्होंने हस्तलिखित पत्रिका का सम्पादन किया। ‘पतितों के देश पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उसमें केवल अंग्रेजों पर ही कटाक्ष नहीं किया गया है अपितु उन भारतीयों को भी सवालों के घेरे में खड़ा किया गया है जो मनुष्य को मनुष्य नहीं समझते। ‘विद्यापति पदावली और ‘बिहारी सतसई जैसी महत्वपूर्ण रचनाओं का भी उन्होंने कुशल सम्पादन किया। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चन्द्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि बेनीपुरी जी ने रूढ़िवादी समाज के बैरियर्स को तोड़ा।

इसी कड़ी में उन्होंने ‘शर्मा उपनाम को अपने नाम से हटाकर अपने गांव के नाम ‘बेनीपुर को अपने नाम के साथ जोड़ लिया। सह प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने भगत सिंह, राजगुरु व चन्द्रशेखर आजाद से बेनीपुरी जी की तुलना करते हुए कहा कि ऐसे क्रांतिकारी कभी मरते नहीं बल्कि अमर हो जाते हैं। पीजी हिंदी विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. आनन्द प्रकाश गुप्ता ने कहा कि बेनीपुरी जी बहुमुखी प्रतिभा से सम्पन्न साहित्यकार थे। वे कुशल सम्पादक भी रहे। सीएम कॉलेज के सहायक प्राध्यापक अखिलेश राठौर ने कहा कि वे सर्वश्रेष्ठ निबन्धकार थे।

उन्होंने आत्मत्याग और आत्म उत्सर्ग का मार्ग चुना और ‘नींव की ईंट बनना स्वीकार किया जबकि वे महल का गुम्बद भी बन सकते थे। शोधप्रज्ञ कृष्णा अनुराग ने कहा कि बेनीपुरी जी क्रांतिधर्मी साहित्यकार थे। ‘माटी की मूरतें और ‘पैरों में पंख बांधकर उनकी कालजयी रचनाएं हैं। विषय का प्रवर्तन और मंच संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार ने किया। उन्होंने क्रांतिकारी साहित्यकार, पत्रकार, उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार और नाटककार बेनीपुरी को नमन किया। धन्यवाद ज्ञापन शोधप्रज्ञ अभिषेक कुमार सिन्हा ने किया। कार्यक्रम में शोधप्रज्ञ धर्मेन्द्र दास, दुर्गानन्द ठाकुर, पुष्पा कुमारी समेत बड़ी संख्या में शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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