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Featured - मुख्य - September 19, 2021

जातिगत जनगणना कराकर ही पेरियार के विचारों को सही साबित किया जा सकता है : प्रो. विजय।

दरभंगा: भारतीय पिछड़ा शोषित संगठन एवं श्रीकृष्ण चेतना मंच के संयुक्त तत्वावधान में पेरियार ईवी रामासामी नायकर की 142 वी जयंती मनाई गई। जातिगत जनगणना के संदर्भ में पेरियार ईवी रामासामी नायकर के विचारों की प्रासंगिकता विषय लोहिया चरण सिंह कालेज में आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य, स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग प्रो. सूर्य नारायण चौधरी, दिनेश साफी ने की।

गोष्ठी का उद्घाटन आरबी कालेज समस्तीपुर के प्राचार्य डा. श्याम चंद्र गुप्ता ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में डीएमसीएच पैथोलॉजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. अजीत कुमार चौधरी पहुंचे थे । विशिष्ट अतिथि के रूप में मिथिला विवि के डीएसडब्ल्यू प्रो. विजय कुमार यादव, , शिशु रोग विशेषज्ञ डा. सूरज और सामाजिक राजनीतिक चितक शंकर प्रलामी शामिल थे। गोष्ठी में प्रो. श्याम चंद्र गुप्ता ने कहा कि सब के विकास के लिए समाज के सभी जातियों एवं वर्गों को सामाजिक शैक्षिक सांस्कृतिक एवं राजनीतिक तौर पर समान स्तर पर लाना जरूरी है।

देश के समावेशी विकास के लिए जातिगत जनगणना आवश्यक है। इस संदर्भ में पेरियार के विचार प्रासंगिक हैं। मुख्य अतिथि डा. अजीत कुमार चौधरी ने कहा कि पेरियार रामासामी जिन विचारों को आगे बढ़ाकर भारत में वैज्ञानिक अवधारणा पर आधारित समाज का निर्माण करना चाहते थे। कहा देश में पारस्परिक अंतर विरोधों को पाटकर एक मजबूत राष्ट्र बनाने का जरिया जातिगत जनगणना है। विशिष्ट अतिथि प्रो. विजय कुमार यादव ने कहा कि जातिगत जनगणना कराकर ही पेरियार के विचारों को सही साबित किया जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि शंकर प्रलामी ने कहा कि समाज में स्त्री समानता एवं बहुजन सत्ता को स्थापित करने का एक उपयुक्त अस्त्र जातिगत जनगणना है। पेरियार के विचार आज और भी प्रासंगिक है, जब धार्मिक कट्टरता समाज पर हावी हो रहा है। गोष्ठी में सुनील कुमार मंडल, विनोद कुमार साह, रामदेव यादव, महेश यादव, शिव किशोर राय, डा. देव नारायण यादव, उमेश राय, डा. प्रशांत कुमार, राजीव कुमार पासवान, सुजाता कुमारी, संतोष कुमार यादव, पवन कुमार यादव, राम बाबू चौपाल, डा. पिकी, डा. गजेंद्र प्रसाद, अधिवक्ता विजय पराजित, समाजसेवी रमा शंकर सहनी, इंद्रजीत कुमार यादव, लक्ष्मी साफी, रजनीश राय भी शामिल थे। विचारों को आचरण में उतारकर ही संघर्ष को धारदार बनाया जा सकता

डा. प्रशांत कुमार ने कहा कि रूढ़ीवादी परंपराओं से मुक्त होकर ही जातिगत जनगणना के उद्देश्यों एवं पेरियार रामासामी के विचारों को स्थापित किया जा सकता है। कहा कि ज्ञान प्राप्त कर ही अपनी हिस्सेदारी के लिए लड़ सकते हैं। प्रो. सूर्य नारायण चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को बनाए रखने के लिए जातिगत जनगणना समय की मांग है। दिनेश साफी ने कहा कि विचारों को आचरण में उतारकर ही संघर्ष को धारदार बनाया जा सकता हैं।

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