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Featured - मुख्य - October 25, 2021

कुलपति ने किया दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन।

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भौतिकी विभाग एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित जुबली हॉल में कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने किया।

कुलपति ने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फोटोनिक्स एंड रेवोल्यूशनरी स्मार्ट मैटेरियल्स’ (एआईपीआरएसएम-2021) विषय पर अपने अध्यक्षीय

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संबोधन में कहा कि बुद्धि मनुष्यों का प्रमुख गुण है। हमारी सभ्यता ने जो भी उपलब्धियां हासिल की हैं, वे मनुष्य की बुद्धि का ही नतीजा हैं। बुद्धि की मदद से ही मनुष्य विभिन्न जानवरों और मशीनों का अपने हित के लिए इस्तेमाल करता है। अब तक जितनी भी मशीनें बनी हैं, वे पहले से निर्धारित काम को ही करती रही हैं, चाहे कारखाने हों, मोटर गाड़ियां हों या कंप्यूटर हो। लेकिन, अब मनुष्यों ने अपनी बुद्धि की मदद से ही मशीनों को बुद्धिमान बनाने के प्रयासों में कुछ कामयाबी हासिल कर ली है। हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में ही है, लेकिन इसके क्रांतिकारी नतीजे सामने आने शुरू हो गए

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हैं। स्वचालित कार, चैटबॉट, पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित होते हैं। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार सिंह और उनकी टीम बधाई के पात्र हैं।

अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की संरक्षक प्रति कुलपति प्रो. डॉली सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के निर्माण से लोगों के जीवन की गुणवत्ता में बदलाव आया है। आधुनिक जीवन में लोगों के पास समय का आभाव सा हो गया है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लोगों का काफी समय बच रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर का उपयोग आजकल

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ज्यादातर लोग करने लगे हैं। इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने में भी लोगों को कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

सम्मानित अतिथि और विश्वविद्यालय के विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. बीएस झा ने अपने व्याख्यान में कहा कि कुलपति के कुशल नेतृत्व के कारण ही आजकल अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां बार-बार आयोजित की जा रही हैं। आज के दौर में आर्टफिशियल इंटेलिजेंस एक लोकप्रिय शब्द बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के को-संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. मुश्ताक अहमद ने कहा कि विश्वविद्यालय का कार्य केवल विद्यार्थियों को सिलेबस पढ़ाना नहीं है।

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देश और समाज को यह भी बताना चाहिए कि बदलते समय के साथ हम अपनी शिक्षण प्रद्धति में क्या बदलाव कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र में आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के अध्यक्ष और भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण सिंह ने कहा कि आधुनिक समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उपयोगिता को देखते हुए इस विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई है। संगोष्ठी के आयोजन में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो अशोक कुमार मेहता व भौतिकी विभाग के प्राध्यापक और शिक्षकेत्तरकर्मियों की अहम भूमिका है।

अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. रितेश कुमार चौरसिया ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के विषय पर प्रकाश डाला।

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