
भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार सामा-चकेवा संपन्न।
दरभंगा: साम चके साम चके आबिह हे, चुगला करे चुगली बिलिया करे म्याऊं’ आदि लोकगीतों के साथ ही भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार सामा-चकेवा गुरुवार को संपन्न हो गया। गत एक पखवाड़े से चल रहे इस लोकपर्व का संध्या समय हर्षोल्लास के संग विसर्जन किया गया।
बहनों ने भाइयों से अटूट संबंध बने रहने की कामना के साथ ही सामा की विदाई की। इससे पूर्व चले हास्य-परिहास के दौर के बाद

समदाउन के स्वर भी सुनाई पड़े। शाम में बेर पर मूर्तियों को संवारकर जलाशयों में विसर्जित किया गया। वहीं कई स्थानों पर इसे खेत में ही छोड़ दिया गया।
इससे पूर्व बहनों ने भाइयों को प्रसाद दिया। शहरी क्षेत्र के हराही, दिग्घी, गंगासागर समेत अन्य तालाबों व बागमती नदी में बेर पर
मूर्तियों को डालकर प्रवाहित किया गया। बहनों ने भाइयों के कल्याण की कामना करते हुए फिर से सामा के आने की कामना के साथ मूर्तियों को जलाशयों में विसर्जित किया।
गत एक हफ्ते से शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण इलाकों में इस पर्व को लेकर बहनें काफी उत्साहित नजर आ रही थीं। गलियों में शाम के बाद लोक गीतों का गायन शुरू हो जाता था। विसर्जन के मौके पर सभी बहनों की आंखें नम थीं।

