
नवजात शिशुओं की मृत्यु कम करने में एसएनसीयू का योगदान महत्वपूर्ण: डॉ0 केएन मिश्रा।
दरभंगा: बिहार में नवजात शिशु मृत्यु दर प्रति हजार 25 है । यह राष्ट्रीय दर 23 से अभी भी पीछे है। भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक इसे घटाकर 16 पर लाने का प्रण लिया है। नवजात शिशुओं की मृत्यु कम करने में एसएनसीयू महत्वपूर्ण योगदान करता है। बिहार सरकार ने इस कारण सभी जिलों एवं मेडिकल कॉलेजों में एसएनसीयू स्थापित करने का निर्णय लिया, जो अब तक लगभग पूर्ण हो चुका है। इन एसएनसीयू में प्रशिक्षित एवं योग्य डॉक्टर और नर्सों की जरूरत लगातार बनी हुई है जिसे एफबीएनसी ट्रेनिंग और उसके बाद होने वाला ऑब्जर्वरशिप कार्यक्रम पूरा करता है। यह बातें समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देते हुए दरभंगा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य सह शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ.के एन मिश्रा ने कही।
डॉ. अशोक कुमार ने भाग लेने वाले चिकित्सकों से कहा कि प्रशिक्षण के दौरान इस्तेमाल होने वाली मॉड्यूल अपने साथ हमेशा रखें और उसे बार-बार देखते रहें जिससे कि नवजात शिशुओं के इलाज में व्याधान न हो। डॉक्टर एनपी गुप्ता ने प्रतिभागियों को अपने जिलों में

स्थापित एस एन सी यू में जाकर स्किल को अच्छे से इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
दरअसल, शिशु विभाग में 18 नवंबर से रविवार तक एफबीएनसी ट्रेनिंग चल रही थी जिसमें 13 जिलों के 24 प्रतिभागियों ने भाग लिया। पूर्णिया, जमुई, बांका, बक्सर, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर, किशनगंज, मधेपुरा, नवादा, सीतामढ़ी, भोजपुर और दरभंगा के चिकित्सक और नर्सों ने इस ट्रेनिंग में आवासीय रूप से प्रशिक्षण लिया।
प्रशिक्षण देने का कार्य प्राचार्य सह विभागाध्यक्ष डॉ. केएन मिश्रा और तीन सहप्राध्यापक डॉ. अशोक कुमार, डॉ. एन पी गुप्ता एवं रिजवान

हैदर ने किया। समापन समारोह के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि जो छोटी-छोटी चीजें उन्हें अपने फैसिलिटी में काम करने में परेशान पैदा करती थी, उसका निदान आज यहां से सीख कर जा रहे हैं।
इस ट्रेनिंग के दौरान प्रतिभागियों ने बच्चों के तापमान में कमी या बुखार, शरीर में शुगर की कमी, चमकी, जौंडिस, सांस में होने वाली दिक्कतें, स्तनपान, कम वजन या समय पूर्व पैदा होने वाले बच्चों की विभिन्न दिक्कतों के बारे में जाना और उसमें प्रयुक्त होने वाले

उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने क्लीनिकल कंडीशन और उसके दौरान इस्तेमाल होने वाले विभिन्न क्लीनिकल स्किल्स को सीखा।
समापन कार्यक्रम में डॉ. रिजवान हैदर ने अपने शेरो शायरी और प्रेरक भाषण से समां बांध दिया। कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. ओम प्रकाश ने आज के कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन किया।

