
मंत्री जीवेश मिश्रा ने उठाया अपने अपमान का मुद्दा, विपक्षी दलों ने की मंत्री को न्याय देने की मांग।
दरभंगा: विधानसभा में प्रश्नोत्तरकाल के दौरान श्रम मंत्री जीवेश मिश्रा ने अपने अपमान का मुद्दा उठाया। कहा, सदन में आते वक्त विधानसभा परिसर में उन्हें रोककर डीएम-एसपी की गाड़ी पास कराई गई। यह जनप्रतिनिधि, मंत्री व सरकार का अपमान है। इसकी वजह से वह सदन में देर से पहुंचे। आसन आश्वासन दे कि दोषियों को दंडित किया जाएगा। उन्होंने दोषियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की।
मंत्री द्वारा मांग करने के साथ ही पूरा विपक्ष उनके समर्थन में वेल में उतर आया और जमकर शोरशराबा किया। विपक्षी दलों ने ”मंत्री को न्याय दो” आदि नारे लगाते हुए सरकार से न्याय की मांग भी की।

सभाध्यक्ष ने बार-बार सदस्यों को शांत कराने की कोशिश की पर न तो विपक्ष व न ही मंत्री माने।
इसके बाद अफसरशाही के बेलगाम होने का आरोप लगते हुए विपक्ष के सदस्यों ने एक-एक कर अपनी-अपनी बात रखी। पूरा प्रश्नकाल इसी में उलझकर रह गया।
प्रश्नकाल में हस्तक्षेप करते हुए जीवेश मिश्रा ने कहा कि उनकी गाड़ी रोकी गयी तो लगा कि सीएम या विस अध्यक्ष आ रहे हैं लेकिन डीएम-एसपी की गाड़ी पास कराने के लिए उन्हें रोका गया। आसन तय करे कि डीएम-एसपी बड़ा, मंत्री बड़ा कि सरकार बड़ी। शोर-

शराबे के बीच सभाध्यक्ष विजय कुमार श्री सिन्हा ने कहा कि विधायकों की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है। किसी को भी बेलगाम नहीं होने दिया जायेगा।
संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी मंत्री के साथ हुई घटना को गंभीर बताया और स्पष्ट किया कि सरकार ने प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इस घटना की परिसीमा विधानसभा अध्यक्ष के अधीन की है। सभाध्यक्ष इसे देखवा लें, सरकार भी मामले को देखेगी।
इसके बाद राजद विधायक ललित यादव, आलोक मेहता, कांग्रेस के अजीत शर्मा व विजय शंकर दूबे, अजय कुमार ने घटना की तीखी निंदा करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की। माले के महबूब आलम ने कहा कि सदन सर्वोच्च है और सभाध्यक्ष को दोषियों पर तत्काल

कार्रवाई करनी चाहिए। सभाध्यक्ष ने सदन की कमेटी से मामले की जांच कराने की घोषणा की। सदन की कमेटी की सिफारिशों के अनुसार कार्रवाई शुरू की जाएगी। हंगामा बढ़ने पर 11.37 पर कार्यवाही 11.45 तक के लिए स्थगित की गई। इसबीच अध्यक्ष ने अपने कक्ष में दलीय नेताओं की बैठक की। 11.49 बजे फिर जब सभा आरंभ हुई तो अध्यक्ष ने 1.15 बजे फिर बैठक की घोषणा की। इसके बाद दूसरी बार विपक्षी विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे- मंत्री को न्याय दो, अफसरशाही नहीं चलेगी, सरकार जवाब दो’।
दस मिनट बाद सदस्य सीट पर लौटे और शून्यकाल, ध्यानाकर्षण आदि संचालित हुए।

