Home Featured क्रूरता के शिकार सांढ़ की ग्रामीणों ने बचायी जान, पशु क्रूरता पर करवाई की जगह प्रशासन खामोश।
Featured - मुख्य - विशेष - December 14, 2021

क्रूरता के शिकार सांढ़ की ग्रामीणों ने बचायी जान, पशु क्रूरता पर करवाई की जगह प्रशासन खामोश।

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दरभंगा: भारत में केवल इंसानों केलिए ही नही, पशुओं के साथ क्रूरता करने पर सख्त कानूनी कारवाई का प्रावधान है। पर ये कानून शायद किताबों में ही ज्यादातर सिमट कर रह जाते हैं। क्रूरता करने वाले बेजुबानों पर कहर ढाते रहते हैं। पूरा गांव भी क्रूरता का गवाह हो, फिर भी कोई खास कारवाई नजर नही आती।

ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है जिले के घनश्यामपुर थानाक्षेत्र के रसियारी गांव का, जहां गांव के लोगों द्वारा मानवता को प्रदर्शित करने वाला कार्य सामने आया है। एक भाला लगे घायल सांढ़ का ईलाज स्थानीय ग्रामीणों ने स्थानीय पशु चिकित्सक डॉ शशिभूषण प्रसाद के सहयोग से सम्पन्न करवाकर एक बेजुबान की जान बचा ली।

इस संबंध में वॉयस ऑफ दरभंगा को जानकारी देते हुए स्थानीय समाजसेवी डॉ पारस मणि ने बताया कि रसियारी चौक पर तीन सांढ़

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अक्सर घूमते रहते हैं। शांत स्वभाव के ये सांढ़ किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नही पहुंचाते। परंतु सोमवार की दोपहर किसी विकृत मानसिकता वाले राक्षसी प्रवृति के व्यक्ति द्वारा एक काले सांढ़ के पीठ में रीढ़ के बायीं ओर करीब 3 फ़ीट लम्बा त्रिकोण वाला भाला मार दिया गया। भाला लगे हुए ही सांढ़ छटपटा कर +2 विद्यालय रसियारी के प्रांगण में चिल्लाते हुए पहुंचा। कुछ देर परिसर में दौड़ते रहने के बाद भागते हुए रसियारी अस्पताल के ओर चला गया, जहाँ इन साँढ़ों का रात्रि विश्राम स्थल रहता है। फिर वहां से भागते हुए करीब पांच किलोमीटर दूर बांध के किनारे चला गया।

डॉ पारस मणि एवं अन्य कुछ दयालु स्वभाव के ग्रामीणों को जब बात पता चली तो वे लोग विद्यालय परिसर पहुंचे। फिर वहां से सांढ़ की तलाश शुरू हुई। डॉ पारसमणि के साथ रामनाथ झा, प्रवीण कुमार खां, रंजीत कुमार झा एवं गौरव कुमार आदि सांढ़ की तलाश में निकल गए।

शाम के करीब 4 से 5 बजे के बीच सभी ग्रामीण मनसारा बांध से उत्तर घनश्यामपुर बांध तक सांढ़ का इलाज करने केलिए उसको पकड़ने केलिए दौड़ लगाते रहे। इसी बीच डॉ पारस मणि का संपर्क रसियारी पशु चिकित्सा केंद्र के पशु चिकित्सक डॉ शशिभूषण प्रसाद से हुआ। डॉ प्रसाद दवा एवं मरहमपट्टी के पूरे इंतजाम के साथ बांध पर पहुंच गए।

इसके बाद रसियारी चौक के व्यवसायी, कमला बांध के निकट के बस्ती के लोग, पुल निर्माण में लगे मजदूर आदि सभी ने मिलकर सांढ़

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को पकड़ा और सड़क से करीब दो किलोमीटर दूर खेत को ही ऑपरेशन थियेटर बना दिया गया। अंततः सफलता पूर्वक भाला निकालकर सांढ़ की मरहमपट्टी कर दी गयी।

इसके उपरांत सांढ़ को तत्काल विचरण हेतु छोड़ दिया गया, तथा पूर्ण रूप से ठीक होने तक उसका इलाज करने एवं ख्याल रखने की जिम्मेवारी ग्रामीणों ने ली।

बताते चलें कि पशु क्रूरता अधिनियम के तहत इस तरह पशुओं के साथ क्रूरता करना गम्भीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके तहत सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कारवाई का प्रावधान है। परंतु जिस कृत्य का गवाह सारा गांव बना, उस क्रूर कृत्य में भी पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर कारवाई करेगी अथवा नही, यह भी देखने वाली बात होगी।

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