
कहीं युवतियों की मौत को डूबने से मौत साबित करने की मानसिकता तो नहीं बना चुका पुलिस प्रशासन!
दरभंगा: पुरखोपट्टी कांड में मृत मिली दोनों युवतियों के मौत की गुत्थी अभी तक पुलिस केलिए पहेली बनी हुई है, अथवा पुलिस इसे पहेली बनाये रखना चाहती है, इसपर पर बड़ा सवाल उठ रहा है। दरअसल, सीओ ने इसे डूबने से मौत मानते हुए दोनों के परिजनों को चार चार लाख का चेक भी दे दिया। इससे ये भी आशंका उतपन्न हो रही है कि कहीं प्रशासन की मानसिकता ही तो इस मौत को डूबने से मौत साबित करने की नही है!
वैसे भी इनदिनों सरकार की नीति के कारण पुलिस का पूरा सूचना नेटवर्क इनदिनों शराब एवं शराब कारोबारियों को पकड़ने में लगा रहता है। इसलिए शायद अन्य घटनाओं के घटने से पूर्व अथवा घटने के बाद भी पुलिस का सूचनातंत्र कार्य नही कर पा रहा है। शराबबंदी पर सरकार की रोज सख्त होती नीति से पूर्व पुलिस का सूचनातंत्र अपराध एवं अपराधियों का पता लगाने में लगा रहता था। इसके

फलस्वरूप कई बार अपराध होने के पूर्व भी पुलिस को सूचना मिल जाती थी और अपराध रुक भी जाता है। परंतु इन दिनों आपराधिक घटनाओं के घटित होने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली रहते हैं।
कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है बहादुरपुर थाना क्षेत्र के पुरखोपट्टी गांव की रहने वाली दो सहेलियों की मौत के मामले में। दोनों युवतियों की मौत अभी तक पहेली बनी हुई है। पुलिस को अभी तक मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस अब पोस्टर्माटम रिपोर्ट के इंतजार में बैठी है।
इधर, परिजनों का कहना है कि दोनों लड़कियों की हत्या हुई है। ग्रामीण भी हत्या की आशंका जता रहे हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि जहां लड़कियों की लाश मिली, उस इलाके में नशेड़ियों का अड्डा बना रहता है। रोज शाम में चौर में नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता

था। हो सकता है कि उन्हीं लोगों ने दोनों लड़कियों की हत्या कर दी हो। ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस इन नशेड़ियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकी है। यदि प्राथमिकी के दिन ही पुलिस ने गंभीरता से काम किया होता तो इस घटना को टाला जा सकता था।
उधर, पुलिस ने नशेड़ियों की तलाश तेज कर दी है। हालांकि उनसे पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। इससे दोनों लड़कियों की मौत की गुत्थी धीरे-धीरे उलझती ही जा रही है।
फिलहाल पोखर में डूबने से मौत होने की घटना मानते हुए बहादुरपुर सीओ ने दोनों मृतकाओं के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दे दिया है। इससे भी अब एक अलग तरह का संदेह प्रशासन की मंशा पर भी उतपन्न हो रहा है। कहीं प्रशासन पहले ही तो इसे डूबने से मौत मानते हुए मामले को दुर्घटना का रूप तो नही देना चाहता है। अगर मुआवजा मिल गया और ये मौत हत्या साबित होती है तो फिर मुआवजा पर अधिकारी घिर सकते हैं, कहीं इसलिए भी तो पुलिस जांच में देरी कर इसे ठंढे बस्ते में डालकर इसे दुर्घटना मान लेने की मानसिकता नही बना रही! यह भी अपनेआप में बड़ा सवाल है।

