Home Featured शराबबंदी को पूर्ण सफल बनाने केलिए पर्दे के पीछे रहने वाले बड़े धंधेबाजों पर शिकंजा कसना जरूरी: एडीजी।
Featured - मुख्य - February 2, 2022

शराबबंदी को पूर्ण सफल बनाने केलिए पर्दे के पीछे रहने वाले बड़े धंधेबाजों पर शिकंजा कसना जरूरी: एडीजी।

दरभंगा: बुधवार को एडीजी (सुरक्षा) बच्चू सिंह मीणा दरभंगा पहुँचे। दरभंगा पहुंचने के बाद सर्वप्रथम उन्हें आईजी कार्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। तत्पश्चात पुलिस महानिरीक्षक सभागार में मिथिला क्षेत्र के तीनों जिले के पुलिस पदाधिकारी के साथ बैठक की। इसमें शराब बंदी की पूर्ण सफलता को लेकर उन्होंने की गई कार्रवाई की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने शराब से जुड़े कांडों के अनुसंधान को लेकर कई तरीकों को भी विस्तारपूर्वक बताया।

उन्होंने कहा कि छापेमारी में अधिकांश छोटे धंधेबाजों की गिरफ्तारी हो रही है। लेकिन, पर्दे के पीछे रहने बड़े लोग बच जाते हैं। इसलिए अनुसंधान ऐसा करना है कि पर्दे के पीछे रहने वाले बड़े धंधेबाजों पर शिकंजा कसा जाए। इसके लिए यह पता करना जरूरी है कि गिरफ्तार धंधेबाजों ने कहां से शराब मंगाई और उसमें किसका-किसका पूंजी लगा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में बिहार के बाहर के धंधेबाजों का नाम आया है। जिन पर कार्रवाई शेष है। ऐसे धंधेबाजों की सूची बनाकर पटना मद्य निषेद्य विभाग को भेजने की

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बात कही ताकि, राज्य स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई में ऐसे धंधेबाजों को सरलता के साथ दबोचा जा सके।

पुलिस महानिरीक्षक ललन मोहन प्रसाद को उन्होंने सभी शराब से जुड़े मामलों की लगातार समीक्षा करने को कहा। जो धंधेबाज एक बार से अधिक बार शराब मामले में पकड़े गए हैं उसकी संपत्ति को नीलाम करने के लिए सूची के साथ प्रस्ताव देने का आदेश दिया। शराब धंधेबाजों पर नकेल कसने के लिए गठित एंटी लीकर टास्क फोर्स को और प्रभावशाली बनाने को कहा।

उन्होंने दरभंगा के प्रभारी एसएसपी अशोक कुमार प्रसाद, मधुबनी के एसपी डा. सत्य प्रकाश और समस्तीपुर एसपी हृदय कांत को उन्होंने

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शराब बंदी की पूर्ण सफलता को लेकर मुख्यालय के निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराने को कहा। उन्होंने कहा कि कांडों के अनुसंधान में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बता दें कि शराबबंदी को सख्ती से लागू कराने के लिए डीजीपी ने मिथिला क्षेत्र में एडीजी (सुरक्षा) बच्चू सिंह मीणा को जिम्मेदारी दी है। इसे लेकर यह उनकी पहली बैठक थी। शराबबंदी को लेकर हो रही कार्रवाई की जांच रिपोर्ट उन्हें हर महीने डीजीपी को सौंपना है।

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