
अपूर्ण कार्यों की जिम्मेवारी राज्य पर थोपने वाले सांसद के पास नहीं है लो कॉस्ट आरओबी में देरी का कोई जवाब!
दरभंगा: दरभंगा शहर में वर्षो से रोजाना सड़क जाम से परेशान आमजनता की समस्या रेलवे क्रासिंग जाम को झेलने में और बढ़ गयी है। रेलवे लाइन दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की आवाजाही लगातार बढ़ गयी, पर करीब आठ वर्षो से प्रस्तावित सात रेलवे ओवरब्रिजों में से एक का भी अभी तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इसके लिए केंद्र सरकार के प्रतिनिधि स्थानीय सांसद राज्य सरकार के ऊपर जिम्मेवारी डाल देते हैं, जबकि हास्यास्पद बात तो यह है कि राज्य और केंद्र में एक ही गठबंधन की सरकार है। इसके अलावा वर्षों से स्थानीय विधायक और सांसद भी सत्तारूढ़ दल के ही हैं।
कई वर्षों तक लंबित रहने के बाद जब दरभंगा में एयरपोर्ट शुरू हुआ और एम्स का प्रस्ताव हुआ तो लोगों को उम्मीद जगी कि अब जाम की समस्या का उपाय निकलेगा। पर सब ढाक के तीन पात।
इस मामले पर जब स्थानीय सांसद गोपालजी ठाकुर से बात की जाती है तो आरओबी निर्माण में देरी की जवाबदेही घुमा फिरा कर राज्य

सरकार द्वारा राज्यांश नही मिलने पर डाल दी जाती है। वैसे सांसद पिछले ढाई साल में कई बार तीन महीने में कार्य शुरू होने का वादा मीडिया के सामने कर चुके हैं। पर उनके तीन महीने तीस महीने बन चुकने के वाबजूद कोई कार्य प्रारंभ नहीं हुआ।
सांसद की इच्छाशक्ति और कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह उनके अधिकार क्षेत्र का कार्य भी नही हो पाना उठाता है। रेलवे स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य होने के वाबजूद प्रमंडलीय मुख्यालय के रेलवे स्टेशन लहेरियासराय में प्रस्तावित लो कॉस्ट आरओबी का निर्माण भी आजतक नहीं करवा सके। सबसे बड़ी बात, इसके निर्माण में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है और यह कम बजट वाला प्रोजेक्ट रेलवे को ही करना है। इसकी पुष्टि हाल ही में सांसद के समक्ष मीडिया को जानकारी देते हुए समस्तीपुर के डीआरएम भी कर चुके हैं। डीआरएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि लो कॉस्ट आरओबी रेलवे को

ही बनाना है। इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। यह पब्लिक वर्क्स प्रोग्राम के तहत आता है, जिसके लिए सांसद की मंजूरी जरूरी होती है और इसके लिए प्रस्ताव गया हुआ है।
सबसे बड़ी बात, उपरोक्त बातें डीआरएम ने मीडिया को सांसद की उपस्थिति में कहीं। इसपर पूछने पर सांसद ने केवल जल्द बनने का आश्वासन एकबार फिर दे दिया। यह आश्वासन वे लगातार कई बार दे चुके हैं।
बताते चलें कि लहेरियासराय में पूर्व में एक लो कॉस्ट आरओबी बना हुआ था। पर क्षतिग्रस्त होने पर इसके पुनर्निर्माण के नाम पर इसे तोड़ा गया। पर कई वर्ष बीत जाने के बाद भी इसका दुबारा निर्माण नहीं किया गया। लहेरियासराय में प्रमंडलीय मुख्यालय होने और इस कारण आवाजाही अधिक होने के कारण लो कॉस्ट आरओबी की सुविधा मिली हुई थी।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि लो कॉस्ट आरओबी का निर्माण रोककर सांसद आखिर जनता को जाम में मरने केलिए क्यों छोड़ रखे हैं! इसके निर्माण में देरी का कोई स्पष्ट जवाब सांसद क्यों नहीं दे पाते हैं! साधारणतया आरओबी निर्माण का बजट यदि 50 करोड़ होता है

तो लो कॉस्ट आरओबी 3 से 5 करोड़ के बजट में बन जाता है। इसके निर्माण की जिम्मेवारी मोटे तौर पर डीआरएम एवं सांसद पर होती है।
साथ ही यह भी बताते चले कि लहेरियासराय स्टेशन के बगल में ही सांसद का आवास भी है और वे भी अक्सर आवास से निकलने के बाद जबतब इस जाम में फंसते रहते हैं। सांसद के अलावा पूर्व मेयर, पूर्व एवं वर्तमान जिला परिषद अध्यक्ष, केवटी के भाजपा विधायक आदि सहित सत्ताधारी दल के कई प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी का आवास भी लहेरियासराय स्टेशन के पूरब तरफ ही है जहां से मुख्यालय की तरफ जाने केलिए उन्हें भी इस महाजाम का सामना करना पड़ता है।

