Home Featured मंत्री द्वारा मैथिली भाषा को लेकर दिए गए जवाब में शीघ्र संशोधन नहीं हुआ तो होगा आंदोलन: बैजू।
Featured - मुख्य - February 16, 2022

मंत्री द्वारा मैथिली भाषा को लेकर दिए गए जवाब में शीघ्र संशोधन नहीं हुआ तो होगा आंदोलन: बैजू।

दरभंगा: मैथिली भाषा एक ऐसी समृद्ध भाषा है, जो न सिर्फ प्राचीन है बल्कि राजकीय समर्थन के बिना भी इसके साहित्य भंडार में निरंतर वृद्धि हो रही है। उक्त बातें मंगलवार को प्रेस वार्ता में विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ0 बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कही।

उन्होंने कहा कि दरभंगा के सांसद डॉ गोपालजी ठाकुर द्वारा लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए सवाल का शिक्षा राज्य मंत्री द्वारा दिया गया जवाब निदनीय है। जिस भाषा को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुआ। उस भाषा के बारे में मंत्रियों द्वारा इस तरह की बयानबाजी करना करोड़ों मैथिली भाषी का अपमान है।

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उन्होंने कहा कि मैथिली भाषा साहित्य की विभिन्न विधाओं में न सिर्फ जीवंत है, बल्कि यह निरंतर बढ़ती और समृद्ध भी होती रही है। इसका प्रसार न सिर्फ भारत में बल्कि नेपाल में भी काफी सक्रियता के साथ अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। कहा कि मैथिली भाषा के संबंध में विस्तृत सूचनाएं एकत्रित कर भारत के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री सहित विभिन्न मंत्रियों एवं मिथिला क्षेत्र के विभिन्न सांसदों को प्रतिवेदन के रूप में भेजा गया है। यदि इस पर त्वरित कार्यवाही नहीं होती है और मंत्री अपने जवाब में संशोधन नहीं करते हैं तो संस्थान मातृभाषा मैथिली की अस्मिता को बचाए रखने के लिए उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगा। संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डा. बुचरू पासवान ने कहा कि भारत और नेपाल में रहने वाले बीस करोड़ से अधिक लोगों की मातृभाषा के बारे में मंत्री द्वारा इस तरह की टिप्पणी किया जाना बहुत ही निदनीय है। पीजी मैथिली विभाग के अध्यक्ष डा. रमेश झा ने कहा कि मैथिली मिथिला के जन जन की भाषा है इसे किसी भी वर्ग-भेद में विभक्त नहीं किया जा सकता। मैथिली पड़ोसी देश नेपाल की भी दूसरी राज्य भाषा के रूप में स्थापित है। इसलिए इसकी अस्मिता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया जाना अत्यंत दुखद है।

मैथिली के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. नारायण झा ने कहा कि जो भाषा वर्ष 1965 से साहित्य अकादमी से जुड़ी हुई है और प्रतिवर्ष मैथिली भाषा में उत्कृष्ट साहित्य सृजन करने वाले लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा जाता रहा है और मैथिली में प्रतिवर्ष सैकड़ों से अधिक शोध कार्य निरंतर हो रहे हैं। उस भाषा को लेकर की गई टिप्पणी में यदि यथाशीघ्र संशोधन नहीं किया गया तो मिथिला के लोग मानहानि का मुकदमा दायर करने के लिए बाध्य होंगे।

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मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकान्त झा ने कहा कि जिस संवैधानिक भाषा का साहित्य भंडार 13 सौ से भी अधिक वर्ष पुरानी हो और जिस भाषा में अनवरत साहित्य सृजन और शोध कार्य हो रहे हों। उस भाषा को लेकर किसी भी तरह की गलत टीका टिप्पणी निदा जनक है।

मौके पर प्रो. अनिल कुमार झा, प्रो उदय शंकर मिश्र, प्रो. चंद्रशेखर झा बूढ़ाभाई, विनोद कुमार झा, आशीष चौधरी भी मौजूद थे।

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