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Featured - मुख्य - February 18, 2022

ग्यारह किसानों को किसान श्री पुरस्कार से किया गया सम्मानित।

दरभंगा: जिलाधिकारी राजीव रौशन ने समाहरणालय स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर सभागार में वर्ष 2020-21 में गेहूं उत्पादन जिले में सर्वाधिक 76 क्विंटल प्रति हेक्टर उत्पादन करने वाले सदर दरभंगा पंचायत के अतिहर गांव के भगवानपुर के किसान रामप्रीत मंडल को किसान गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया। साथ ही प्रखंड स्तर पर सर्वाधिक प्रति हेक्टर गेहूं उत्पादन करने वाले 11 और किसानों को किसान श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें सदर दरभंगा प्रखंड के बिजुली पंचायत के गौसा ग्राम के किसान सुनील कुमार यादव, बेनीपुर प्रखंड के जरसों पंचायत के लवानी ग्राम के किसान रामनरेश झा, हायाघाट प्रखंड के रसुलपुर पंचायत के रसुलपुर ग्राम के किसान दिनेश यादव, तारडीह प्रखंड के पोखरभिंडा पंचायत के पोखरभिंडा ग्राम के किसान तेजनारायण सिंह, अलीनगर प्रखंड के गरौल पंचायत के गरौल ग्राम के किसान लाल बाबू महतो, बिरौल प्रखंड के इटवा शिवनगर पंचायत के बराही ग्राम के किसान राजा राम यादव, मनीगाछी प्रखंड के राजे पंचायत के राजे ग्राम के किसान श्री नारायण झा, जो रसायन शास्त्र के प्रोफेसर भी रह चुके हैं।

हनुमाननगर प्रखंड के मोरो पंचायत के गौढ़वाड़ ग्राम के किसान मनोज कुमार चौधरी, कुशेश्वरस्थान प्रखंड के हिरणी पंचायत के कुबौटन ग्राम के किसान ललन नायक, घनश्यामपुर प्रखंड के रसियारी पंचायत के फैजुल्लाहपुर ग्राम के किसान रेणु देवी एवं केवटी प्रखंड के पैगम्बरपुर पंचायत के पैगम्बरपुर ग्राम के किसान ओम प्रकाश यादवेन्द्र शामिल हैं। इस अवसर पर किसान गौरव से पुरस्कृत किसान रामप्रीत मंडल ने अपने अधिक उत्पादन के संबंध में बताया कि विगत 4 वर्षों से वे अपनी जमीन की उर्वरकता की निगरानी कर रहे थे।

मृदा कार्ड के अनुसार उर्वरक दे रहे थे। वर्ष 2020-21 में उन्होंने गेहूं बीज का उन्नत किस्म 2967, जो सरकार की ओर से मुहैय्या करायी गई थी, का प्रयोग किया तथा अधिक से अधिक वर्मी कम्पोस्ट प्रयोग किया, क्योंकि वे पशुपालन भी करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी फसल के लिए वर्मी कम्पोस्ट उपर्युक्त उर्वरक है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि अधिक से अधिक अपने खेतों में वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि 8 कट्टा खेत में बुआई के समय 16 किलो डीएपी. व 4 किलो एल्मुनियम सल्फेट व पटवन के समय 4 किलो पोटास डाले थे।

जिलाधिकारी ने कहा कि जब आप एक संगठन बनाते हैं, तो संगठन अपने आप में एक शक्ति होता है। उन्होंने कहा कि 1 किसान अगर 50 क्विंटल भी उत्पादन कर लिया, तो भी वह बाजार में बड़े स्तर पर बात नहीं कर सकता है, लेकिन 400 किसान यदि अपने उत्पादन को 1 जगह रखता है, तो देश के बड़े व्यापारी, बड़ी कंपनी से भी उत्पाद बेचने की बात कर सकता है, जो उस उत्पाद पर अपना व्यवसाय, अपना कारखाना चलता है।

डीएम राजीव रौशन ने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बिहार में बीज उत्पादन की असीम संभावना है और बीज उत्पादन को बढ़ाने के लिए बिहार राज्य बीज निगम कार्य करती है। उन्होंने कहा कि किसान अगर अपने खेत में बीज का उत्पादन करते हैं, तो उसका दर निर्धारण करके उस दर पर उस बीज को बिहार राज्य बीज निगम खरीद लेती है। उन्होंने किसान श्री पुरस्कार से पुरस्कृत किसान-सह-प्रोफेसर श्री नारायण झा के सुझाव को इंगित करते हुए कहा कि किसान उत्पादन समूह (एफपीओ) बनाकर किसान बीज उत्पादन को बढ़ावा दे सकते हैं।

रामप्रीत मंडल ने कहा कि हमने अपने उत्पाद में केवल वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग किया, तो इसकी जानकारी यदि इसकी मार्केटिंग में दी जाए, तो आज ऐसे भी उपभोक्ता समूह है, जो अपने स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से ऐसे उत्पाद को अधिक कीमत पर खरीदने को तैयार हैं। इसलिए अपने उत्पाद की मार्केटिंग पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हल ही में नबार्ड की बैठक हुई थी, जिसमें किसान उत्पादक समूह बनाने पर चर्चा हुई थी, यह 300 से 400 किसानों का एक समुह होता है। लोग कहते है कि इसका क्या फायदा है। जुड़ने वाले किसान कहते है कि इससे हमें क्या लाभ मिलेगा?

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