Home Featured महिला शिक्षिकाओं केलिए परेशानी का सबब बना हुआ है मूल्यांकन केंद्र पर शौचालय की समस्या।
Featured - मुख्य - March 8, 2022

महिला शिक्षिकाओं केलिए परेशानी का सबब बना हुआ है मूल्यांकन केंद्र पर शौचालय की समस्या।

दरभंगा: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर मंगलवार को जहां सरकार से लेकर आमजन तक नारी के सम्मान में तरह-तरह के आयोजन कर नारी शक्ति का सम्मान करने की ढिंढोरे पीट रहे हैं वहीं नारियों की अनकही व्यथा को साबित करने के लिए सरकारी मशीनरी की विफलता आज भी यथावत बनी हुई है। शहरी क्षेत्र में एक विद्यालय ऐसा भी है है, जहां मूल्यांकन कार्य में लगी महिला शिक्षिकाओं केलिए एक स्वच्छ शौचालय उपलब्ध न होने से शिक्षिकाएं प्रतिदिन मानसिक यंत्रणा का शिकार होने के साथ साथ बीमारियों के भय से भी ग्रसित भी हो रही है। जबकि बिहार सरकार ‘स्वच्छता’ अपनाए जाने को लेकर विभिन्न स्तरों पर गांव से लेकर शहरी क्षेत्र में कई तरह की योजनाओं को संचालित कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

कुछ ऐसा ही उदाहरण शहरी क्षेत्र अंतर्गत सुन्दरपुर बेला उच्च विद्यालय में इनदिनों दिख रहा है। यहां इन दिनों मैट्रिक परीक्षा की काँपी के मूल्यांकन का कार्य चल रहा है। बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाएं भी मूल्यांकन कार्य के लिए विभिन्न विद्यालयों से

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प्रतिनियोजन पर है। सुबह 10 बजे से संध्या पांच बजे तक कांपी मूल्यांकन कार्य चल रहा है। विद्यालय में टूटा-फूटा गंदा शौचालय उपयोग करना उनकी विवशता बन गयी है। बीमारी की आशंका से वे भयभीत भी है।

विडंबना तो ये है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी का कमान एक महिला के हाथ में होने के वाबजूद स्थिति इतनी बदतर बनी हुई है। जब एक महिला अधिकारी महिला कर्मियों की परेशानियों को नही समझ सकती तो भला पुरूष समाज को सजग होने की जरूरत क्या है। महिला दिवस के मौके पर नारियों के सम्मान में कशीदे पढ़ना तो आता है लेकिन उनकी वेदनाओं को पढ़ने की फुर्सत न तो सरकार है और न ही उनके नुमाइंदों को।

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