Home Featured सड़क दुर्घटना में अठारह वर्षीय युवक की मौत।
Featured - मुख्य - March 11, 2022

सड़क दुर्घटना में अठारह वर्षीय युवक की मौत।

दरभंगा: अलीनगर प्रखंड क्षेत्र के किरतपुर गांव निवासी लक्ष्मण माली के मझले पुत्र रंजन माली (18 वर्ष) की बीते गुरुवार की देर शाम बेनीपुर-बिरौल मुख्य मार्ग के दाथ गांव स्थित एक गिट्टी-बालू की दुकान के पास बाइक दुर्घटना में हुई गंभीर रूप से जख्मी होने पर डीएमसीएच में इलाज के दौऱान मौत हो गई। बतादें कि रंजन माली जयंतीपुर दाथ चौक पर फूल-माला एवं सजावट सामग्री की दुकान चलाता था।

इसके अलावा वह वीडियोग्राफी का भी काम करता था। बगल के एक दुकानदार के अनुसार मृतक शाम को दुकान बंद करने के बाद अपनी बाइक में पेट्रोल भड़वाने के लिए शिवनगर घाट गया था। वहां से वापस आने के क्रम में नेउरीटोल दाथ सीमा के अंतर्गत संचालित श्यामविनोद इंटरप्र्राइजेज के पास बेनीपुर से बिरौल की ओर तेज रफ्तार से जा रही किसी अज्ञात चार चक्का वाहन से आमने-सामने इतना जोरदार ठोकर मारते हुए भागता रहा कि रंजन करीब 30 फीट दूर सड़क पर जा गिरा जिससे उसके एक पैर की हड्डी टूटने के साथ सिर का फटने से काफी खून बह रहा था। आनन-फानन में दुकानदार एवं उसके कर्मी ने पहुंचकर तत्काल उसे अनुमंडल अस्पताल बेनीपुर पहुंचाया। तब तक सूचना मिलने पर उसके परिजन भी पहुंच चुके थे।

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गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे डीएमसीएच रेफर किया गया जहां इलाज के दौरान देर रात रंजन माली ने अपने जीवन की अंतिम सांसे ले ली। इधर पुत्र की मौत की खबर सुनते ही दिल्ली में मजदूरी कर रहे पिता लक्ष्मण माली फ्लाइट से दरभंगा पहुंचकर सीधे डीएमसीएच पहुंचे। जहां उसके वेदना और चीत्कार को देख मौजूद हर किसी के आंखों से आंसू निकल रहा था।

जबकि मृत होने की सूचना मिलते ही गांव में भी परिजनों के चीत्कार से शुक्रवार की सुबह पूरा गांव गमगीन हो गया। वहीं शुक्रवार की शाम पोस्टमार्टम के बाद लाश का घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। चीख पुकार के बीच परिजनों ने तत्काल ही उसका अंतिम संस्कार कराया। दैबा हो दैबा, हम्मर दुलरुआ के किये छीन लेलहक हो दैबा… सड़क दुर्घटना के बाद देर रात को इलाज के दौड़ान रंजन माली के मौत होने की सूचना शुक्रवार की सुबह मां राजकुमारी देवी को मिलते ही दहाड़े मार मारकर बिलखने लगी। फिर क्या था देखते ही देखते परिजनों के चीत्कार को सुन गांव के लोग दौड़ पड़े। हर कोई रंजन की मौत की खबर सुन एवं मां सहित भाइयों एवं चाचा-चाची सहित परिजनों को ढाढस बंधाने की असफल प्रयास के साथ खुद के भी आंसू कोई नहीं रोक पा रहे थे। मां राजकुमारी देवी बार-बार दैबा हो दैबा, हम्मर दुलरुरा के किये छीन लेलहक हो दैबा…बोलते हुए चीत्कार के साथ बार-बार मूर्छित होकर गिर रही थी

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