
मठ-मंदिरों के स्थापना काल से चली आ रही परंपरा को सरकार द्वारा निरस्त करने की रची जा रही साजिश: मौनी बाबा।
दरभंगा: लहेरियासराय स्थित पचाढ़ी छावनी में गुरुवार को राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे साधु-संतो एवं महंतों की बैठक पचाढ़ी छावनी के महंत राम उदित दास की अध्यक्षता में हुई। इसमें मठ-मंदिरों को लेकर दिए जा रहे विरोधाभासी बयान की सभी ने एक स्वर से निंदा की।
बैठक में उपस्थित संतों ने एक स्वर में कहा कि मठ-मंदिरों को लेकर आए दिन समाचार पत्रों के माध्यमों से जो सूचनाएं मिल रही हैं वह सनातन धर्म पर आघात है। इसे हिंदू समाज कतई स्वीकार नहीं करेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मौनी बाबा ने कहा कि मठ- मंदिरों के स्थापना काल से चली आ रही परंपरा को सरकार के द्वारा निरस्त

करने की साजिश रची जा रही है। हमारे पूर्व आचार्यों के आध्यात्मिक शक्ति द्वारा अर्जित संपत्ति हमारी पैतृक संपत्ति है। इसे सरकार द्वारा अधिग्रहण करके हमारे मौलिक अधिकार के हनन करने का साजिश हो रही है।
इसका विरोध संपूर्ण साधु समाज करेगा। सरकार को जब भी स्कूल, कॉलेज, अस्पताल या सरकारी भवन के लिए जमीन की आवश्यकता होती है मठ के महंत द्वारा उन्हें जमीन मुहैया कराई जाती है। सीलिंग
एक्ट में भी धार्मिक व मठ की जमीन को अधिशेष घोषित कर अधिग्रहण कर लिया गया है। सरकार धार्मिक बजट नहीं बनाती है और कर वसूली कर शोषण करना चाहती है। इसकी साधु समाज निंदा करता है।
बैठक में पातेपुर महंत विश्व मोहन दास, पोखराम महंत राम शंकर दास, धेरुख महंत राम ललित दास, अवध किशोर दास, बाथो के महंत राम विनोद दास, बनवारीपट्टी के महंत रतन किशोर दास, मथुरापुर के महंत उपेंद्र दास, शिवराम दास, शिवराम के महंत श्रीकांत दास, श्यामसुंदर दास, सझुआर के महंत ललन दास, महंत अवध किशोर दास, बेगूसराय के शंभू दास सहित सैकड़ों मठ मंदिर के महंतों ने भाग लिया।

