
फखरुद्दीन अली अहमद टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में एक दिवसीय सेमिनार का किया गया आयोजन।
दरभंगा: मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि बच्चों में सबसे बड़ा भाग्य परीक्षा का होता है जिस की एनईपी 2020 में सुधार कर लिया गया है। अब शुरू के 5 वर्षों तक कोई भी परीक्षा नहीं होगी। शिक्षा नीति को अनुभव करने की आवश्यकता है। जब तक हम कोई समस्या को समस्या नहीं मानते हैं, तब तक वह कोई समस्या नहीं बनता है। हमें आपदा से अवसर तलाशने की जरूरत है, हमारे शिक्षक शिक्षा ग्रहण नहीं करेंगे तब तक वह बच्चों को सही से शिक्षा नहीं दे सकते हैं। दीप की लो इस बात पर निर्भर करती है। दीपक में कितना तेल डाला गया है। इसी प्रकार बच्चों का शिक्षा ही उस शिक्षक की योग्यता बतलाता है। इससे पूर्व फखरुद्दीन अली अहमद टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में सोमवार को एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

सेमिनार के मुख्य अतिथि के रुप में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसपी सिंह मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित मुश्ताक अहमद एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. एजाज मशीब साहब को कॉलेज के डॉ. नजिब अख्तर ने सभी को पुष्पा गुच्छ दे कर स्वागत किया। सेमिनार का उद्घाटन विद्यालय के कुलपति अभी प्रज्वलित कर किया। कुलसचिव डॉ. मुश्ताक अहमद ने कहा कि गांधीजी की मूलभूत शिक्षा यह कहती है कि बच्चों में नई चीजों को खोजने की योग्यता उत्पन्न होनी। गांधीजी की मूलभूत शिक्षा यह कहती है कि बच्चों में नई चीजों को खोजने की योग्यता उत्पन्न होनी चाहिए। साथ ही कौशल का विकास भी होना चाहिए। नई शिक्षा नीति एक अच्छी पहल है परंतु इसका परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे अनुशंसित किस प्रकार से किया जाएगा। नई शिक्षा नीति शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालयों के लिए एक चुनौती है। मुख्य वक्ता जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली के शिक्षा विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. एजाज मसीह ने कहा कि चुनौती और समस्या में अंतर होता है।

