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Featured - मुख्य - March 28, 2022

संस्कृत विश्वविद्यालय की दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण कार्य सोमवार से शुरू।

दरभंगा: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण कार्य सोमवार से शुरू किया गया है। इस कार्य का शुभारंभ कुलपति प्रो. शशिनाथ झा ने किया। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार कल्चरल हेरिटेज के आजीवन सदस्य डा. सुशांत कुमार के समक्ष पांडुलिपियों के संरक्षण कार्य कर रहे संस्थान इंटैक के कंजर्वेटर विनोद कुमार तिवारी एवं सुरेश प्रताप सिंह को कुल नौ ग्रंथों की पांडुलिपि संरक्षण के लिए सौंपी गई। इसमें हरिताली कथा, अध्यात्म रामायण, दुर्वासा-उर्वशी संवाद, इतिहास समुच्चय, जैभिवि पुराण, गरुड़ पुराण, लिग पुराण, शिव पुराण एवं पंचदशी तत्वविवेक दो भाग शामिल है। महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय के संग्रहालय अध्यक्ष डा. शिव कुमार मिश्र ने बताया कि इंटैक बिहार चैप्टर के कन्वेनर प्रेम शरण द्वारा सूचित किया गया है कि बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग एवं उक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव को इंटैक द्वारा तीन तीन हजार फोलियो को निशुल्क संरक्षित करने का प्रस्ताव भेजा गया था। उसे पूरा किया जाएगा। इसके लिए इंटैक चेयरमैन मेजर जनरल एलके गुप्ता ने भी अनुमति प्रदान कर दी है। मिथिला शोध संस्थान में 1036 फोलियो का संरक्षण कार्य पूर्ण

इंटैक विशेषज्ञ टीम द्वारा मिथिला शोध संस्थान की 1036 फोलियो का संरक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। अब और करीब दो हजार फोलियो पर काम होने की संभावना बढ़ गई है। शोध संस्थान एवं विश्वविद्यालय में क्रमश: साढे बारह हजार एवं साढे पांच हजार पांडुलिपि संगृहीत हैं। इन सभी पांडुलिपि का संरक्षण कार्य होना जरूरी बताया गया है। इंटैक द्वारा उक्त संस्थानों में तीन-तीन हजार फोलियों का निशुल्क काम करने के बाद शेष ग्रथों पर सशुल्क कार्य करने के लिए सरकार एवं विश्वविद्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मौके पर दिलीप कुमार झा, श्याम कुमार ठाकुर, नरोत्तम मिश्र भी उपस्थित थे। इधर पांडुलिपियों के संरक्षण कार्य को लेकर कुलपति द्वारा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसके लिए कर्मचारी एवं सुरक्षा प्रहरी प्रतिनियुक्त किए गए हैं।

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