
सीताक प्रासंगिकता : संदर्भ मैथिली साहित्य विषय पर संगोष्ठी का आयोजन।
दरभंगा: महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह मेमोरियल कॉलेज के मैथिली विभाग की ओर से सोमवार को ‘सीताक प्रासंगिकता : संदर्भ मैथिली साहित्य’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य प्रो. मंजू चतुर्वेदी ने की।
मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री उषा किरण खान आमंत्रित थीं, पर अपरिहार्य कारणवश उनके नहीं आ सकने की स्थिति में उनके द्वारा प्रेषित आलेख का वाचन मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. उषा चौधरी ने किया। श्रीमती खान ने विवेचित किया कि सीता के धवल चरित्र को मिथिला के लोक ने जिस उदारता और आत्मीयता के साथ अंगीकृत कर रखा है, वैसी व्यापकता मैथिली साहित्य में परिलक्षित नहीं होती।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शशिनाथ झा ने मैथिली के अलावा संस्कृत और हिंदी में रचित राम काव्य पर

प्रकाश डालते हुए कहा कि अलग-अलग कालखंडों में रचे गए ऐसे काव्यो में रचनाकारों ने समसामयिक युगबोध को कुशलतापूर्वक विन्यस्त किया है। साहित्य अकादमी पुरस्कृत मैथिली के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. मुरलीधर झा ने कहा कि सीता मात्र मिथिला ही नहीं, संपूर्ण जगत की जननी रूप में मान्य रही हैैं। इसी क्रम में उन्होंने रमेश्वर चरित मिथिला रामायण में दिए गए पुष्कर खंड में चिह्नित सीता के आदिशक्ति स्वरूप का भी उल्लेख किया। अन्य वक्ताओं में डॉ. योगानंद झा, डॉ. प्रेम मोहन मिश्र, स्नातकोत्तर मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश झा आदि शामिल थे।
अतिथियों का स्वागत डॉ. शांतिनाथ सिंह ठाकुर ने किया। मंच संचालन डॉ. सतीश कुमार सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मीनू कुमारी ने किया। संगोष्ठी में डॉ. ऋषिकेश कुमार, डॉ. तीर्थनाथ मिश्र, डॉ. भवनाथ झा, डॉ. निरंजन कुमार झा, डॉ. कैलाश नाथ मिश्र आदि थे।

