Home Featured सरकारी बैंको के निजीकरण का प्रस्ताव जनविरोधी: संजय खॉं।
Featured - मुख्य - April 9, 2022

सरकारी बैंको के निजीकरण का प्रस्ताव जनविरोधी: संजय खॉं।

दरभंगा: उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक इम्पलाईज व ऑफिसर्स फेडरेशन का पंचम त्रैवार्षिक महाधिवेशन शनिवार को सम्पन्न हुआ। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में आयोजित इस सम्मेलन में उत्तर बिहार के 18 जिलों के लगभग 500 प्रतिनिधियों ने भाग भाग लिया।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ऑल इण्डिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव संजय कुमार खॉं ने कहा कि सरकार द्वारा बैंक निजीकरण के केन्द्र सरकार का प्रस्ताव जनविरोधी कदम है। बैंक राष्ट्रीयकरण के बाद से बैंको ने देश के आर्थिक विकास में

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अभूतपूर्व योगदान किया है। हरित क्रांति को सफल कर खाद्यान्न के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाया। सस्ते व्याज पर कर्ज देकर करोड़ो युवाओं को रोजगार दिया। जनधन खाता खोलने में विश्वस्तर पर कीर्तिमान स्थापित किया और क्लास बैंकिंग को मास बैंकिंग का दर्जा दिलाया। लाखों युवाओं को बैंक में नौकरी मिली । परन्तु सरकार कॉरपोरेट घरानों जो बैंक के करोड़ो रूपये का कर्ज डूबा चुके हैं उन्हीं के हाथ बेचना चाहती है। इसका बैंक यूनियन्स द्वारा करारा विरोध किया जा रहा है और 15-16 दिसम्बर तथा 28-29 मार्च को हड़ताल किया गया। फिर भी सरकार बैंक निजीकरण के लिए आगे कदम बढाती है तो बैंक ऑफिसर्स और इम्पलाईज अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए तैयार हैं।

मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए ऑल इण्डिया बैंक इम्पलाईज एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि बैंक की मूल समस्या अरबों रुपए का एनपीए है जिसकी वसूली के लिए सरकार कोई कारगर कदम नहीं उठा रही है। कम्पनियों को इन्सालवेन्सी और बैंकरप्सी कोड के अन्तर्गत दिवालिया घोषित कर नेशनल कम्पनी लॉ ट्रिब्यूनल के माध्यम से अरबों के एनपीए कुछ लाख में बेंच दिए जाते हैं और शेष राशि का घाटा बैंक को उठाना पड़ता है। मात्र 13 कम्पनियों का

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एनपीए ऋण 446800 करोड़ को 161820 करोड़ में बेंच दिया गया जिससे बैंक को कुल 284980 करोड़ का घाटा हुआ। इस सम्बन्ध में एआईबीईए ने सरकार से मांग किया है कि जानबूझकर बैंक ऋण नहीं चुकाने वाले के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान किया जाए।

इस अवसर पर ऑल इण्डिया ग्रामीण बैंक इम्पलाईज एसोसिएशन के महासचिव जीजी गॉधी मुख्य वक्ता के रूप में सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए ग्रामीण बैंक के भायबलिटी की समस्या और इसके समाधान के लिए देश भर के तमाम 43 ग्रामीण बैंको के संरचनात्मक परिवर्तन की आवश्यकता बताई और जनहितमें ग्रामीण बैंको को उनके प्रायोजक व्यावसायिकबैंक में विलय को एकमात्र विकल्प कहा।

खुले सत्र की अध्यक्षता डीएन त्रिवेदी और कुमार शेखर ने संयुक्त रूप से की। मौके पर उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के महासचिव प्रदीप कुमार मिश्र तथा मिथिला विश्वविद्यालय के भूतपूर्व विभागाध्यक्ष व ईतिहास के प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमर ने प्रतिनिधियों तथा आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया।

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