
सांस्कृतिक पुनरुत्थान में आधुनिक भारतीय विचारकों का योगदान विषय पर सेमिनार का आयोजन।
दरभंगा: मारवाड़ी कॉलेज में मंगलवार को समाजशास्त्रत्त् तथा संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने ‘सांस्कृतिक पुनरुत्थान में आधुनिक भारतीय विचारकों का योगदान’ विषय पर विचार रखे।
उद्घाटन करते हुए सीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. फुलो पासवान ने कहा कि छठी सदी में ही बुद्ध ने कहा था कि जानो, समझो तब मानो और अंधविश्वास पूर्ण एवं तर्कहीन बातों को न स्वीकारो। उन्होंने ज्योतिबा फूले व सावित्री बाई के शिक्षा- प्रसार तथा डॉ. अंबेडकर के संवैधानिक प्रबंधन की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से भारत में सामाजिक और सांस्कृतिक सुधार की गति तीव्र हुई। मुख्य अतिथि पीजी समाजशास्त्रत्त्

विभागाध्यक्ष प्रो. शाहिद हुसैन ने कहा कि पैतृक एवं अर्जित दोनों रूपों में संग्रहित संस्कृति में परिस्थिति एवं काल के अनुसार आवश्यक सकारात्मक परिवर्तन स्वभाविक है। सम्मानित अतिथि के रूप में विवि के पूर्व सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. गोपी रमण प्रसाद सिंह ने कहा कि संस्कृति का निर्माता स्वयं मानव ने ही अपनी जरूरत के लिए किया है। विशिष्ट अतिथि सीएम कॉलेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. आरएन चौरसिया ने भारत के नवजागरण व आध्यात्मिक चेतना के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद का सांस्कृतिक पुनरुत्थान में योगदान की विस्तार से चर्चा की।
डॉ. पुतुल सिंह ने कहा कि आधुनिक काल में अनेक विचारक हुए, जिन्होंने संस्कृतिक पुनरुत्थान के प्रति आमलोगों को जागरूक किया। सीएम कॉलेज के समाजशास्त्रत्त् विभागाध्यक्ष

डॉ. प्रभात कुमार चौधरी व एमके कॉलेज के समाजशास्त्रत्त् विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज चौधरी ने भी विचार रखे। अध्यक्षीय संबोधन में प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. कन्हैया जी झा ने कहा कि स्वतंत्रता काल में अनेक महापुरुषों के सद्प्रयास से सांस्कृतिक पुनरुत्थान की गति तीव्र हुई।
सेमिनार की रूपरेखा समाजशास्त्रत्त् विभागाध्यक्षा एवं सेमिनार की संयोजिका डॉ. सुनीता कुमारी ने किया

