
67 लाख की बरामदगी मामले में तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल।
दरभंगा: दरभंगा के ग्रामीण कार्य विभाग-दो के निलंबित तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (प्रभारी अधीक्षण अभियंता) अनिल कुमार के विरुद्ध विशेष न्यायालय (निगरानी) में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। 28 अगस्त, 2021 को मुजफ्फरपुर-पटना मुख्य मार्ग में वाहन जांच के दौरान उसके स्कार्पियो से 18 लाख रुपये व बाद में दरभंगा स्थित किराये के आवास से 49 लाख रुपये पुलिस ने बरामद किया था। 14 फरवरी 2022 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। तभी से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। आठ मार्च को विशेष न्यायालय (निगरानी) ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
जांच पूरी करने के बाद डीएसपी (पश्चिमी) अभिषेक आनंद ने उसके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। अब उसकी मुश्किलें बढ़ेंगी।

जल्द ही आरोप तय होने के बाद उसके विरुद्ध विशेष कोर्ट में सेशन ट्रायल चलेगा। शुरू में इस मामले का आइओ तत्कालीन डीएसपी (पश्चिमी) सैयद इमरान मसूद को बनाया गया था। उनके स्थानांतरण के बाद डीएसपी पश्चिमी अभिषेक आनंद को बनाया गया।
बताया जाता है कि शुरुआती पूछताछ में के दौरान कार्यपालक अभियंता ने पुलिस को बताया कि 55 लाख परिचितों और 12 लाख रुपये उसके थे। इसमें उसके रिश्तेदार भोला महतो के 10 लाख, त्रिभुवन महतो के 10 लाख, अभिषेक रंजन के 10 लाख, मीना कुमारी के 10 लाख व पद्मजा कुमारी के 15 लाख रुपये थे। पुलिस ने जब इसका सत्यापन कराया तो सभी इससे मुकर गए।
बताते चलें कि पंचायत चुनाव के दौरान 28 अगस्त की सुबह फकुली ओपी के निकट पुलिस वाहन जांच कर रही थी। कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार अपने चालक के साथ स्कार्पियो से पटना की ओर जा रहे थे। स्कार्पियो को रोक कर

पुलिस तलाशी लेनी चाही। पहले तो उसने अधिकारी होने का धौंस दिखाना चाहा, लेकिन पुलिस धौंस में नहीं आई। जब उसके स्कार्पियो की तलाशी ली गई तो सीट के नीचे रखे झोले से 18 लाख रुपये बरामद हुए। इसके बाद दरभंगा के लहेरियासराय थाना के बरहेता रोड स्थित किराये के आवास से 49 लाख रुपये बरामद हुए। फकुली ओपी के तत्कालीन अध्यक्ष उदय कुमार सिंह ने उसके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई।
दरभंगा के नगर विधायक संजय सरावगी ने इस मामले को विधानसभा में उठाया। तब विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने जांच कमेटी गठित की। कमेटी को तीन माह के अंदर रिपोर्ट सौंपनी थी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और कार्यपालक अभियंता को गिरफ्तार कर लिया। विभाग ने भी उसे निलंबित कर दिया।

