
तेजी से भू-गर्भीय जलस्तर में आ रही है गिरावट, पानी के अभाव में सूख रहे हैं पौधे।
दरभंगा: दरभंगा में इसबार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है। तापमान का पारा तीन दिनों से लगातार 41 एवं 42 डिग्री को पार कर रहा है। एकतरफ जहां गर्मी के कहर से लोग परेशान हैं, वहीं जिला में तेजी से भू-गर्भीय जलस्तर में गिरावट आ रही है। पीएचइडी विभाग के पास इस समस्या से निबटने के लिए उपलब्ध संसाधन जनसंख्या के हिसाब से नाकाफी है। विभाग के पास आठ हजार लीटर वाला 25 चलंत टैंकर है, परंतु पांच ही नगर निगम को उपलब्ध कराया गया है। इससे पूरे शहर के लोगों की प्यास नहीं बुझायी जा सकती।
यही हाल चापाकल मरम्मत का भी है। लगभग 20 वर्ष पहले से

प्रधान मिस्त्री के स्वीकृत पद 25 हैं। इसमें से अधिकांश परलोक सिधार चुके हैं। 10 सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन्हें संविदा पर नियोजित किया गया है। इनके भरोसे एक-चार की चापाकल मरम्मत टीम संचालित है। यानी, एक प्रधान मिस्त्री और तीन हेल्पर की टीम है।
पीएचइडी की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च तक अधिकतर क्षेत्र में पानी का लेवल 2021 की तुलना में घट गया है। कई ऊपरी सतह वाले क्षेत्र में एक फुट तक पानी का स्तर नीचे चला गया है।

दूसरी ओर कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पानी का स्तर 2021 की तुलना में कुछ ही इंच कम हुआ है।
बता दें कि वर्ष 2021 में इस महीने पानी का जलस्तर 14 फुट तीन इंच था। वहीं, चालू साल के इस महीने में ही पानी का जलस्तर 13 फुट दो इंच तक पहुंच गया है, जबकि सामान्यता भू-जल का स्तर 18 फीट पर होना चाहिए।
वहीं भूजल स्तर में गिरावट की रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पानी की दिक्कत आने से पहले ही तैयारी पूरी कर लें। उन इलाकों की निगरानी बढ़ा दें, जहां पानी का स्तर मार्च में ही गिर गया है। विभाग का मानना है कि अगर इसी तरह गर्मी रही, तो अप्रैल अंत तक जलस्तर में और जगहों पर भी गिरावट आ सकती है। पीएचइडी द्वारा पांच चलंत

पेयजल टैंकर नगर निगम को उपलब्ध कराया गया है। इसके के माध्यम से संकटग्रस्त इलाकों में जलापूर्ति की जा रही है।
हलांकि दो दिन पहले ही दरभंगा के जिलाधिकारी राजीव रौशन ने अधिकारियों के संग बैठक कर नलजल की कमियों एवं खराब चापाकलों की मरम्मती का आदेश सम्बंधित विभागों को दिया है। उन्होंने सारी कमियों को 15 दिन के अंदर दूर करने का आदेश दिया है। पर परिस्थितियों को देखते हुए यह सम्भव नहीं लग रहा है और एकबार फिर जिला भयंकर जल संकट की ओर जाता दिख रहा है।

