
21वीं सदीं की मांग के अनुसार तैयार की गई है राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: प्रतिकुलपति।
दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से संचालित बीएड (नियमित) में मंगलवार को विभाग की प्रार्थना सभा में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिकुलपति प्रो. डॉली सिन्हा भी शामिल हुईं।
विभागाध्यक्ष डॉ. अरविन्द कुमार मिलन ने पुष्पगुच्छ से उनका स्वागत किया। मौके पर रक्तदान शिविर में भाग लिए सभी छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को प्रतिकुलपति ने प्रमाणपत्र व स्मृति चिन्ह प्रदान किया। साथ ही प्रो. सिन्हा ने कैंपस सेलेक्शन में चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई दी। कैंपस सेलेक्शन में राजा बाबू, आदर्श कुमार, सुशांत कुमार सिंह, अमित कुमार, धर्मेंद्र

कुमार यादव, नैना कुमारी, शैलेंद्र कुमार यादव, अमरदीप कुमार, मेघा, जितेंद्र कुमार, जूसी कुमारी, चंदन कुमार, अमिषा राज एवं रंजना भारती का तयन हुआ है।
इस अवसर पर प्रो. सिन्हा ने कहा कि शिक्षा के स्वरूप को 21वीं सदी के अनुरूप बदलना होगा। 21वीं सदीं की मांग के अनुसार ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व में जिस तरह से विषयों का विभाजन किया गया था, वह रुचि

के अनुसार छात्रों के लिए शिक्षा ग्रहण करने में बड़ी बाधा साबित हो रही थी। लेकिन, वर्तमान शिक्षा नीति में इसे समाप्त कर दिया गया है। यह बड़ी उपलब्धि है। अब विज्ञान के छात्र कला के विषयों को भी साथ लेकर पढ़ सकते हैं। शिक्षा को स्थानीय भाषा में देने का प्रावधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किया गया है। शिक्षक को छात्रों के अंदर के ऊर्जा को बाहर निकालना होगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति छात्रों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। कोरोना काल की चुनौती को हम लोगों ने अवसर के रूप में बदला है, जिसमें तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आने वाली पीढ़ी को तकनीक में सबल होना

होगा। उन्होंने तकनीक के बेहतर उपयोग के लिए नीट की महत्ता को बताया।
उन्होंने बीएड के छात्रों से कहा कि एक शिक्षक को ऊर्जा से भरपूर, उत्सुकता, जिज्ञासा, अच्छा वक्ता, बढ़िया संगठनकर्ता एवं आजीवन सीखने जैसे गुणों का होना बहुत ही जरूरी है। एक शिक्षक छात्रों के लिए मार्गदर्शक के साथ-साथ उसका अभिभावक भी होता है। प्रो. सिन्हा ने प्रार्थना सभा के नियमित आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। विभाग की सहायक प्राध्यापका निधि वत्स ने धन्यावद ज्ञापित किया।

