Home Featured गीता में वर्णित भक्तियोग का स्वरूप एवं महत्व विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।
Featured - मुख्य - May 9, 2022

गीता में वर्णित भक्तियोग का स्वरूप एवं महत्व विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।

दरभंगा: सीएम कॉलेज के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में सोमवार को ‘गीता में वर्णित भक्तियोग का स्वरूप एवं महत्व विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इसमें सौ से अधिक लोगों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि पंजाब विवि, होशियारपुर की प्राध्यापिका प्रो. ऋतु बाला ने कहा कि दिव्य व शास्वत आध्यात्मिक ग्रंथ गीता में ज्ञान, कर्म और भक्ति का अद्भुत समन्वय है। यह ज्ञानकोष मानव जाति का युग-युग तक कल्याण करता रहेगा। गीता ज्ञान किसी धर्म-संप्रदाय या जाति-वर्ग तक ही सीमित न होकर समस्त मानवता का कल्याण करने में सक्षम है।

मुख्य वक्ता जामिया मिलिया इस्लामिया केन्द्रीय विवि, नई दिल्ली के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. जयप्रकाश नारायण ने कहा कि गीता आध्यात्मिक ज्ञान का अमूल्य निधि है, जिसका संपूर्ण विश्व में आदरणीय स्थान है। विशिष्ट अतिथि कमला नेहरू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय प्राध्यापिका डॉ. सरिता शर्मा ने कहा कि ब्रह्मज्ञानी व कर्मत्यागी बनना कठिन है, पर भक्तियोग से मुक्ति पाना सहज और सरल है। अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. फुलो पासवान ने आयोजक, अतिथि एवं प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामना देते हुए कहा कि मिथिला में छह में से चार दर्शनों का प्रादुर्भाव हुआ है। भक्तियोग अन्य योगों से सरल एवं सफल योग है।

Advertisement

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. आरएन चौरसिया ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि समाज निर्माण में गीता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत व कार्यक्रम का संचालन डॉ. विकास सिंह व धन्यवाद ज्ञापन समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता कुमारी ने किया। कार्यक्रम में मारवाड़ी कॉलेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. विकास सिंह व समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता कुमारी ने भी विचार व्यक्त किए। दिल्ली विवि से डॉ. मैत्रेयी कुमारी, एमआरएम कॉलेज से डॉ. नीलम सेन, सीएम कॉलेज से डॉ. मसरूर सोगरा, संस्कृत विवि से डॉ. दीनानाथ साह, मिथिला विवि के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. जीवानंद झा आदि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

Share