Home Featured जानकी नवमी को राजकीय पर्व घोषित करवाने का करेंगे का करेंगे प्रयास: मंत्री।
Featured - मुख्य - May 10, 2022

जानकी नवमी को राजकीय पर्व घोषित करवाने का करेंगे का करेंगे प्रयास: मंत्री।

दरभंगा: मंगलवार को जनकनन्दिनी माँ सीता के प्राकट्य दिवस जानकी नवमी के उपलक्ष्य में विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्री सीता पूजनोत्सव सह मैथिली दिवस समारोह का आयोजन किया गया।

एमएमटीएम कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त रूप से श्रम संसाधन व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री जीवेश कुमार मिश्र, कला संस्कृति व युवा मामलों के मंत्री आलोक रंजन झा, लनामि विवि के कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. शशिनाथ झा, बेनीपुर विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी, नगर विधायक संजय सरावगी, पूर्व कुलपति द्वय पं. देव नारायण झा एवं पं. उपेंद्र झा, पूर्व विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार चौधरी, मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं. कमलाकांत झा व चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा ने किया।

मुख्य अतिथि मंत्री जीवेश कुमार मिश्र ने कहा कि मां जानकी मिथिला की बेटी है, इस नाते उनका स्वागत और जानकी नवमी मनाना हम सभी मिथिलावासियों का दायित्व और कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में मां सीता की भूमिका अहम है। आज मिथिला को इफ्तार नहीं, रफ्तार की जरूरत है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में साफ दिख रहा है।

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मंत्री आलोक रंजन झा ने कहा कि हम लोग भाग्यशाली हैं जो हम मिथिला में जन्म लिए। उन्होंने दरभंगा के राज मैदान को अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और जानकी नवमी को अगले साल से राजकीय पर्व के रूप मनाये जाने के लिए प्रयास करने की बात कही। सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि मिथिला विद्वानों की धरती है। यहां की वाणी काफी मधुर है और यहां के लोग उससे भी अधिक धैर्यवान हैं। उन्होंने मां जानकी को त्याग व समर्पण का बेहतर उदाहरण बताया।

संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. शशि नाथ झा ने कहा कि उनके जैसा उदात्त चरित्र संपूर्ण विश्व के इतिहास में मिलना असंभव है। नगर विधायक संजय सरावगी ने कहा कि सीताराम सदियों से भारतीय जनमानस के लिए आराध्य रहे हैं। बेनीपुर विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि मिथिला की भाषा मैथिली यदि समाज का आईना है तो इसकी धरोहर लिपि मिथिलाक्षर मां जानकी का गहना है। उन्होंने मिथिलाक्षर के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए इसे दैनिक प्रयोग में लाने पर बल दिया।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि मिथिला विभूतियों की जननी है। आध्यात्म व संस्कृति के क्षेत्र में कई विभूतियों को जन्म देकर मिथिला ने देश को समृद्ध किया है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि दशरथ पुत्र भगवान राम कभी मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं कहलाते यदि मां जानकी का उन्हें साथ नहीं मिला होता।

साथ ही पूर्व विधान पार्षद प्रो. दिलीप कुमार चौधरी, मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं. कमलाकांत झा, पं. देव नारायण झा, पं. उपेंद्र झा, एमएलएसएम कॉलेज की प्राचार्य डॉ. मंजू चतुर्वेदी, सीएम कालेज के प्राचार्य डॉ. फुलो पासवान, डॉ. विद्यानाथ झा, डॉ. ओमप्रकाश आदि ने भी अपने विचार रखे।

अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी ने कहा कि मां जानकी मिथिला के लोगों के रंग-रग में बसी हुई है, लेकिन यह सबसे बड़ी त्रासदी है कि मिथिला के लोगों को आज भी मां जानकी की तरह कदम कदम पर अग्निपरीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है।

संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा संचालन में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. ममता ठाकुर, डॉ. सुषमा झा, पं. कुंज बिहारी मिश्र, दुखी राम रसिया, करण-अर्जुन, सुभद्रा झा आदि ने गीत-संगीत की छटा बिखेर कर खूब वाहवाही लूटी। तबला पर हीरा कुमार झा, इलेक्ट्रॉनिक बैंजो पर पं. इन्द्र कांत झा आदि ने उंगली के जादू का जमकर प्रदर्शन किया।

इसके पूर्व सुबह में मां सीता की प्रतिमा के शास्त्रीय विधि से पूजन के मौके पर गंधर्व कुमार झा ने सस्वर वेद ध्वनि की जबकि वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने स्वरचित जानकी चालीसा का पाठ किया।

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