
कैडबरिक स्पाइन वर्कशॉप में रीढ़ की बनावट एवं बीमारियों से कराया गया अवगत।
दरभंगा: डीएमसीएच के एनाटॉमी व ऑर्थोपेडिक विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को कैडबरिक स्पाइन वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल के एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन डॉ. एसपी सिंह ने किया। उन्होंने बेहतर आयोजन के लिए संगठन सचिव डॉ. गौरी शंकर झा की सराहना की।
उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में श्री सिंह ने कहा कि कैडबरिक स्पाइन वर्कशॉप एक तरह की विशेष ट्रेंनिंग है। इसका अनुभव ऑर्थोपेडिक सर्जन को प्राप्त करना चाहिए। दरभंगा मेडिकल कॉलेज में पहली बार कैडबरिक स्पाइन वर्कशॉप का आयोजन किया जाना सराहनीय है। ऐसे आयोजन से छात्रों को भी लाभ मिलेगा।
अधीक्षक डॉ. हरिशंकर मिश्रा ने कहा कि बिना अनुभव और सीखे बिना बेहतर चिकित्सक बनना संभव नहीं है। इस तरह के वर्कशॉप से अनुभव मिलता है जिससे छात्र सफल चिकित्सक बनने में कामयाब होते हैं।
प्राचार्य डॉ. केएन मिश्रा ने समय-समय पर विभिन्न तरह के वर्कशॉप के आयोजन पर बाल दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा

वर्कशॉप से केवल चिकित्सकों को ही लाभ नहीं पहुंचेगा बल्कि प्रथम वर्ष के छात्र भी उतने ही लाभान्वित होंगे। डीएमसीएच के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एसएन सर्राफ ने कहा कि ऐसे आयोजन से छात्र आत्मविश्वास से लैस होकर सफल सर्जरी कर सकेंगे। एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. जीके मिश्रा, बिहार और झारखंड एनाटॉमी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. विनोद कुमार, बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के सेक्रेटरी डॉ. महेश प्रसाद, बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मनोज चौधरी और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. गौड़ी शंकर झा ने भी विचार रखे।
वर्कशॉप के साइंटिफिक सेशन में पांच वक्ताओं ने स्पाइन पर अपना वक्तव्य रखा। डॉ. महेश प्रसाद ने गर्दन की सर्जरी की एवं डॉ. सैयद इफ्तेकार ने कैडेवर पर स्पाइन सर्जरी की। इस वर्कशॉप में दरभंगा सहित बिहार के विभिन्न जगहों से आये 136 सदस्यों ने भाग लिया। डॉ. जीएस झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। डॉ. राधिका रमण, डॉ. अर्चना गौतम और डॉ. दिलशाद को बेहतर आयोजन के लिए सम्मानित किया गया।

