
गूगल ने मैथिली भाषी लोगों की उम्मीदों को नये पंख लगा दिए: डॉ० बैजू।
दरभंगा: सदियों पुरानी मैथिली भाषा एवं साहित्य को विश्व स्तर पर पहचान देते हुए गूगल ने अपने अनुवाद विकल्प की श्रेणी 24 अन्य भारतीय भाषाओं के साथ मैथिली को भी शामिल कर इसकी चिरप्रतीक्षित मांग को पूरा करने के साथ साथ देश-विदेश में रहने वाले मैथिली भाषी लोगों की उम्मीदों को नये पंख लगा दिए हैं। शुक्रवार को यह उद्गार विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने व्यक्त किए। उन्होंने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई सहित गूगल की पूरी टीम के प्रति आभार जताया।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकान्त झा ने कहा कि यह संपूर्ण मिथिलावासी एवं मैथिली भाषियों के लिए गौरव का विषय है। प्रो जीवकांत मिश्र ने कहा कि गूगल के ट्रांसलेशन टूल में मैथिली के शामिल होने से करोड़ों लोगों की मातृभाषा मैथिली की भाषागत समृद्धि से अब पूरी दुनिया के लोग वाकिफ हो सकेंगे। वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि नई तकनीक के माध्यम से मैथिली अब विश्व पटल पर अपनी अमिट पहचान बनाने में सक्षम हो सकेगी।

मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि गूगल के इस पहल से भारत के अन्य भाग व विदेशों में रहने वाले लोगों को अपनी मातृभाषा मैथिली को सही तरीके से जानने, बोलने व इसके समुचित व्यवहार में मदद मिलेगी लेकिन मैथिली के अथाह शब्द भंडार के मद्देनजर अभी इस टूल पर और अधिक काम करने की जरूरत होगी. गूगल के इस पहल पर डा महेंद्र नारायण राम, प्रो विजय कांत झा, विनोद कुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, दुर्गा नंद झा, डा गणेश कांत झा, डा उदय कांत मिश्र, आशीष चौधरी, पुरूषोत्तम वत्स, नवल किशोर झा आदि ने भी हर्ष जताया।

