
छोटे मुरारी बापू के मुख से राम कथा को सुनने को उमड़ रही है श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
दरभंगा: एक श्रेष्ठ और उदाहरणात्मक पुरुष की पहचान इस बात से होती है कि वह महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है। महिलाओं का आदर-सम्मान, पुरुष की सर्वोत्कृष्टता का सबसे बड़ा प्रमाण है। भगवान राम को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया जा सकता है जो महिलाओं के प्रति नैतिक आचरण के साथ-साथ सामाजिक आचरण के भी आदर्श हैं। उक्त बातें बहादुरपुर प्रखंड क्षेत्र उघड़ा गांव में 6 दिनों से चल रहे श्री हनुमान महायज्ञ में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक श्रीश्री108 छोटे मुरारी बापू ने कही।
वे मंगलवार के रात्रि को सिया राम विवाह प्रसंग को संगीतमय कथा का रसपान कराते हुए उन्होंने कहा कि सीता जी मां गौरी पूजन के लिए फुलवारी से फूल तोड़ने के लिए जाती हैं। उसी फुलवारी में भगवान राम का दर्शन उन्हें होता है। सीता की नजर राम पर पड़ती है तो वह मोहित हो जाती हैं। दूसरी तरफ भगवान राम को सीता के नुपुर की आवाज मोहित करती हैं। गौरी की पूजा करते समय सीता जी अपने वर के रूप में राम को मांगती हैं। राजा जनक गुरू विश्वामित्र के साथ राम व लक्ष्मण को धनुष यज्ञ शाला ले गए। जहां देश विदेश के राजा सुंदर सिंहासन पर विराजमान थे। राजा जनक ने अपनी प्रतिज्ञा के बारे में सभी को अवगत कराया कि जो इस धनुष को तोड़ेगा उसके साथ सीता का विवाह होगा। सभी राजा बारी-बारी से धनुष तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन सभी असफल रहे। लंका का राजा रावण भी धनुष तोड़ने का प्रयास करता है लेकिन एक भविष्यवाणी उसे विचलित कर दिया। वीर राजाओं के धनुष न तोड़ पाने के कारण निराश राजा जनक को देखकर गुरू विश्वामित्र का इशारा पाकर राम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हैं तो अन्य राजा आश्चर्य चकित हो जाते हैं। धनुष टूटने के बाद राम व सीता एक दूसरे के गले में जयमाल डाल देते हैं। धनुष टूटते ही फूलों की वर्षा शुरू होती है।

कथा के दौरान श्री बापू के श्रीमुख के कथा को सुनने के जिले भर से हजारों की संख्या लोगों की भीड़ उमड़ रही है। कथा के दौरान लगातार रामायण के प्रमुख आकर्षणों को झांकी के माध्यम से भी लोगों के बीच प्रस्तुत किया जा रहा है, जहां लोगों का भरपूर प्यार कथा के प्रति देखी जा रही है, श्रद्धालुओं द्वारा उपहार भी लाए जा रहे है।
इस दौरान दूर दराज से आनेवाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए लगातार सेवादल के सदस्य कुंवर जी झा, सुमन जी झा, अभिमन्यु झा, रमन जी झा, नरेश सहनी, पंकज झा, धीरज झा, भरत महापात्र, साजन महतो आदि मौजूद रहते है।

