
मैथिली कला, साहित्य व सिनेमा जगत के महानायक रवींद्रनाथ ठाकुर के निधन से शोक की लहर।
दरभंगा: मैथिली कला, साहित्य व सिनेमा जगत के महानायक रवींद्रनाथ ठाकुर का बुधवार को 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे विगत कुछ वर्षों से कैंसर से पीड़ित थे। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को हरिद्वार में किया जाएगा। उनके निधन की खबर आते ही संपूर्ण मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। साहित्यकार डॉ. भीमनाथ झा ने कहा कि स्व ठाकुर स्नातकोत्तर करने के बाद बिहार सरकार के वित्त विभाग में नौकरी करते हुए उन्होंने मैथिली साहित्याकाश को जो ऊंचाई दी, वह हमेशा प्रशंसनीय और अनुकरणीय बना रहेगा। डॉ. बैद्यनाथ चौधरी ने कहा कि रविंद्र नाथ का दरभंगा व मिथिला की धरती से अन्योन्याश्रित संबंध रहा और दरभंगा की मिट्टी उन्हें सदैव सम्मानित ढंग से स्मरण करती रहेगी। वहीं मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकान्त झा ने कहा कि मैथिली अकादमी के क्रमश: सहायक निदेशक एवं निदेशक के रूप में उनका योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। मैथिली फिल्म ममता गाबय गीत में एक गीतकार के साथ-साथ फिल्म निर्माण में इनकी भूमिका हमेशा यादगार बनी रहेगी। प्रो जीवकांत मिश्र ने कहा कि वे एक अच्छे रचनाकार होने के साथ-साथ अनुपम गायक भी थे।
दरभंगा के वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि रवीन्द्र जी मातृभाषा की समृद्धि के लिए साहित्य सृजन को एक महत्वपूर्ण कारक मानते थे। यही कारण था कि वे जीवन पर्यंत नए सिर्फ नए नए गीतों का सृजन करते रहे, बल्कि उनकी अनेक कालजयी रचनाओं में मैथिली की आत्मा बसती है। डॉ. महेंद्र नारायण राम ने कहा कि मिथिला विभूति, मिथिला रत्न एवं प्रबोध सम्मान आदि से सम्मानित रवींद्र जी उत्कृष्ट गीतकार होने के साथ-साथ मैथिली में युगल गायन परंपरा के प्रवर्तक थे।

शहर के प्रवीण कुमार झा ने कहा कि अर्थपूर्ण रचनाओं के सृजन करने वाले रवीन्द्र जी कवि कोकिल विद्यापति के बाद की पंक्ति के श्रेष्ठ गीतकारों में शामिल थे। वह एक ऐसे युग प्रवर्तक रचनाकार थे जिनकी रचनाएं मैथिली भाषी लोगों के हृदय में हमेशा विराजमान थे।

