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Featured - मुख्य - June 2, 2022

बाल गृह के आठ बच्चे विषाक्त भोजन के शिकार, जांच के नाम पर बिल्ली को दूध की रखवाली का जिम्मा!

तमाम निरीक्षण परीक्षण के वाबजूद कुव्यवस्था की खुली पोल।

दरभंगा: लहेरियासराय के सैदनगर अवस्थित बाल गृह, जहां मां-बाप एवं परिवार से किसी कारण बिछड़े बच्चे लाये जाते हैं, उनके रहने खाने आदि की पूरी व्यवस्था सरकार द्वारा की जाती है। वाबजूद इसके कभी बच्चे भाग जाते हैं तो कभी बच्चे विषाक्त भोजन का शिकार होते हैं। बात करें निगरानी की तो अक्सर वरीय अधिकारियों द्वारा नीरीक्षण परीक्षण की खबरें आती रहती हैं। हाल ही में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्कालीन सचिव जावेद आलम ने भी गहन नीरीक्षण किया था। परंतु एक बात जो सबसे बड़ा आश्चर्य पैदा करता है, वह है लाखो करोडों विज्ञापन एवं जागरूकता कार्यक्रम के नाम पर खर्च करने वाले जिला बाल संरक्षण इकाई का इन सभी की सिर्फ कागजी खानापूर्ति करना। न ही जागरूकता कार्यक्रमो का कहीं प्रचार प्रसार दिखता है और न ही विभाग जागरूक दिखता है। फिर भी जांच का जिम्मा विभाग के सहायक निदेशक को मिलना कहीं न कहीं बिल्ली को दूध की रखवाली का जिम्मा माना जा सकता है।

ताजा मामले में गुरुवार को बाल गृह के आठ बच्चों के विषाक्त भोजन का शिकार होकर बीमार होने की सूचना मिली है। सभी बच्चों का इलाज डीएमसीएच में चल रहा है। यदि मामला डीएमसीएच नहीं पहुंचता तो कई मामलों की तरह यह मामला भी दबा रह जाता।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार विषाक्त भोजन खाने से गुरुवार को दरभंगा बाल गृह के आठ बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। उलटी व दस्त होने पर उन्हें इलाज के लिए डीएमसीएच के मेडिसिन विभाग में दाखिल कराया गया। इलाज के बाद इनमें से छह बच्चों को खतरे से बाहर बताया जा रहा है। वहीं, दो बच्चों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सभी बच्चों इलाज डॉ. एससी झा यूनिट में चल रहा है। बच्चों को मेडिसिन विभाग में लाए जाने के बाद चिकित्सकों ने अविलंब इलाज शुरू कर दिया। अधीक्षक डॉ. हरिशंकर मिश्रा ने भी उन लोगों की स्थिति की जानकारी ली। बच्चों का इलाज कराने में बाल गृह के कई स्वयंसेवक भी मुस्तैद दिखे। हालांकि बच्चों के खान-पान को लेकर पूछने पर उन लोगों ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।

इधर, दो-तीन बच्चों ने बताया कि भोजन में उन्हें चावल, दाल व आलू-सोयाबीन की सब्जी परोसी गई थी। खाने के कुछ देर बाद उल्टी होने लगी। दवा देने के बाद भी राहत नहीं हुई तो उन्हें डीएमसीएच में भर्ती कराया गया। यूनिट इंचार्ज डॉ. एससी झा ने कहा कि यह फूड प्वॉजनिंग का मामला प्रतीत होता है। छह बच्चों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। दो बच्चों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि जांच के लिए सैंपल भेजा जाएगा।

डीएम राजीव रौशन ने कहा, मामले की जानकारी मिली है। सहायक निदेशक, बाल संरक्षण को जांच का निर्देश दिया गया है। जानकारी मिली है कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं।

जिलाधिकारी द्वारा जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक को ही जांच का जिम्मा सौपने का मतलब कहीं न कहीं बिल्ली को दूध की जिम्मेवारी सौंपना माना जा सकता है, क्योंकि कहीं न कहीं जवाबदेही विभाग की ही बनती है। तो क्या ऐसे में विभाग स्वयं के स्तर से हुई चूक का जांच खुद कर पायेगा, यह भी देखने वाली बात होगी।

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