
सर्पदंश के बाद रात भर इलाजरत रहने के बाबजूद हुई बच्चे की मौत से डीएमसीएच की व्यवस्था पर उठा सवाल।
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दरभंगा: दरभंगा में यदि कोई सर्पदंश का शिकार हो जाये और विष तत्काल न भी चढ़े और ससमय अस्पताल पहुंच जाए, फिर भी उसका बचना मुश्किल है। वह भी तब जब पूरी रात इलाज का मौका भी मिले, फिर भी जान बचने की उम्मीद नहीं है।
डीएमसीएच की कुव्यवस्थाओं एवं लापरवाही की पोल एकबार फिर एक ऐसे ही मामले में खुली है। दरअसल, बहादुरपुर थाना क्षेत्र के पतोर ओपी अंतर्गत गोपीपट्टी गांव में शनिवार की शाम सुरेश मुखिया के 12 वर्षीय पुत्र सुमन मुखिया को कटसारी नदी के किनारे खेलने के दौरान एक सांप ने डस लिया। आनन-फानन में परिजन उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर डीएमसीएच लाये और इलाज केलिए इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया। रातभर बच्चे का इलाज चलता रहा, लेकिन सुबह आठ बजे डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
डीएमसीएच में मृतक के चाचा रामवृक्ष मुखिया ने बताया कि शाम करीब छह बजे सुमन को सांप ने डस लिया। गांव में गाड़ी की सुविधा नहीं थी इसलिए हम लोगों ने उसे मोटरसाइकिल पर ही बिठाकर डीएमसीएच में एडमिट करवाया। रातभर उसका इलाज चला लेकिन फिर भी बच्चे को बचा नहीं पाया।
इन घटना ने डीएमसीएच प्रशासन पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इलाज केलिए पर्याप्त समय मिलने पर भी बच्चे की जान नही बच पाने के पीछे डॉक्टरों के ज्ञान का अभाव कारण रहा या सर्पदंश के दवा की अनुपलब्धता, यह सवाल तो सवाल ही बनकर रह गया।

