
बलभद्रपुर में काली पूजा के दौरान पिछले सात वर्षों से स्थापित हो रही है भगवान परशुराम की प्रतिमा।
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दरभंगा: सोमवार की रात एक तरफ ज्योति पर्व दीपावली के बीच लक्ष्मी-गणेश की पूजा की धूम रही तो वहीं दूसरी ओर असुरों का संहार करने वाली भगवती काली की पूजा की व्यवस्था में भक्त जुटे रहे। आधी रात होते ही उनकी तीन दिवसीय विधिवत पूजा शुरू हो गई। काली मंदिरों के साथ ही सार्वजनिक पूजा पंडालों से शंख व घंटे के स्वर गूंज उठे। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुरोहित ने पूजन आरंभ कराया। मंत्र दोहराते यजमान माता को जल, फूल, चंदन, सिंदूर, अक्षत चढ़ाते उनकी पूजा में लगे रहे। काले रंग की मुंडमाल धारण किए, एक हाथ में खप्पड़ व दूसरे में तलवार लिए जिह्वा निकाले भगवती के सामने धूप-धूमन के सुगंधित धुएं उठते वातावरण को खुशबू से भरते रहे और भक्त जन उनके सामने हाथ जोड़े कल्याण का आशीष मांगते रहे। पूजन के उपरांत सामूहिक आरती हुई।

शहर के बलभद्रपुर में पचाढ़ी महंथ परिसर में पिछले 31 वर्षों से अनवरत मां काली की पूजा का आयोजन किया जा रहा है। नवयुवक काली पूजा समिति के बैनर तले पूरे मुहल्लेवासी पूरी तन्मयता से पूजा को सम्पन्न करने में लगे दिखते हैं।
पूजा पंडाल को आकर्षक रूप से सजाया गया है। पंडाल के परिसर में रंग बिरंगे बिजली बल्वों के जगमगाहट से पूजा स्थल आकर्षक का केंद्र बना हुआ है। पूजा स्थल पर हो रहे देवी भक्ति गीतों से क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है।
यहां पिछले सात वर्षों से स्थापित होने वाली भगवान परशुराम की मूर्ति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। काली पूजा के दौरान भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना का अद्वितीय कार्य भी इस स्थल की अलग ही महत्ता को बढ़ाता है।

