
‘उर्दू टीईटी की जल्द बहाली नहीं की गई तो जाट और पटेल समाज की तरह आन्दोलन करेंगे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग’

दरभंगा: पिछले वर्ष से लगातार बिहार सरकार ने उर्दू टी0ई0टी0 की बहाली का मजाक बनाकर रख दिया है। लगातार शिक्षक सड़कों पर आन्दोलन करते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रहा है। अभी पिछले दो-तीन दिनों के अन्दर पटना में टी0ई0टी0 यूनियन के लोगों ने धड़ना दिया लेकिन शिक्षा मंत्री अशोक चैधरी के पास उनसे वात्र्ता करने के लिए समय की कमी देखी गई। इस मामले को लेकर आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नजरे आलम की अध्यक्षता में एक आपात बैठक क्षेत्रिय कार्यालय लालबाग, दरभंगा में बुलाकर पूरे मामले पर चर्चा किया। श्री नजरे आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक मामला पहुँच चुका है और मुझे ऐसी सूचना भी मिली है कि अल्पसंख्यक समुदाय के विधायक एवं मंत्री ने मुख्यमंत्री से जल्द बहाली कराने की माँग की है जो सराहनीय कदम है। यही काम हमारे नेता अगर पहले किए होते तो इन बेरोजगार लोगों को कबका रोजगार मिल गया होता। खैर ‘‘देर आयद दुरूस्त आयद’’ वाली कहावत यहाँ पर फिट बैठता है। श्री नजरे आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब से बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं तब से एैसा लगने लगा है कि बिहार की दूसरी सरकारी जबान कही जाने वाली उर्दू को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। जिसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल है। क्योंकि श्रीमान मुख्यमंत्री न तो स्कूलों में उर्दू के शिक्षकों की बहाली करवा रहे हैं और बहुत सारे काॅलेजों में उर्दू के शिक्षक नहीं होने की वजह कर उर्दू की शिक्षा नहीं हो रही हैं उसपर ध्यान दे रहे हैं। जब्कि अल्पसंख्यक समुदाय ने हमेशह नीतीश कुमार को प्रचण्ड समर्थन दिया है। लेकिन न तो अल्पसंख्यकों को किसी विभाग में नौकरी की बहाली निकाली जा रही है और नहीं अल्पसंख्यक समुदाय के किसी अच्छे व्यक्ति को बिहार सरकार के सैकड़ों निगम और बोर्ड हैं जिसमें किसी पद पर उन्हें विकास की डोर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी ही दी जा रही है। अब एैसा लगने लगा है कि श्री नीतीश कुमार सिर्फ पटना तक ही सिमित होते जा रहे हैं और पटना में ही सरकार को सिमट कर रख दिया है बाकी के जिला पर से इनका ध्यान उठता जा रहा है। बैठक में श्री नजरे आलम ने साफ तौर पर कहा कि अब बहुत रोना रोया गया बिहार सरकार के आगे। हमें भीख नहीं अधिकार चाहिए, शिक्षा चाहिए, रोजगार एवं सुरक्षा चाहिए। अगर एैसा नहीं हुआ तो आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ अक्टूबर-2016 महीने से दलित-मुस्लिम रिजर्वेशन की माँग को लेकर आन्दोलन करेगा। साथ ही उर्दू शिक्षकों की जल्द बहाली नहीं कि गई और जिन लोगों का ग्रेस के नाम पर पत्ता साफ कर दिया गया है उनके साथ न्याय नहीं किया गया तो जिस प्रकार से गुजरात में पटेल समाज और हरियाणा में जाट समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतर कर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ी है ठिक उसी प्रकार से अल्पसंख्यक समुदाय भी आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के बैनर तले अपने अधिकार के लिए सड़कों पर उतरेगा और जबतक अधिकार नहीं मिलेगा तबतक आन्दोलन चलता रहेगा। बैठक को अकरम सिद्दीकी, जावेद करीम जफर, सरवर अली फैजी, विजय कुमार झा, पप्पु खान, मिर्जा नेहाल बेग, शाह इमादुद्दीन सरवर, असद रशीद नदवी, जुबैर आलम, समीउल्लाह नदवी, मो0 अरफात, मो0 असमतुल्लाह ने भी सम्बोधित किया।

