
एलएनएमयू का 44वाँ स्थापना दिवस पर कार्यक्रम आयोजित।

दरभंगा। ए जिलानी
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय 44वाँ स्थापना दिवस मना रहा है. इस मौके पर विश्वविद्यालय की ओर से कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ. लेकिन विभागीय कार्य पर असर नहीं हुआ. विभागीय कार्य आम दिनों के जैसा चलता रहा. प्रात: समय प्रभातफेरी और परिसर में अवस्थित महापुरूषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित की गई, तो शाम के समय स्रातकोत्तर संगीत विभाग में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जो समाचार लिखे जाने तक जारी है. विश्वविद्यालय के भवनों को भी रंग-बिरंगी रौशनी से सजाया गया है. शाम शुरू हुई मुख्य समारोह का शुभारम्भ करते हुए कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने विश्वविद्यालय के स्थापना में योगदान देने वाले महापुरूषों को याद किया और इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें आभार व्यक्त किया और कहा कि मिथिला की धरती हमेशा उनके कृतियों को याद रखेगी. इस समारोह में कुलपति ने बेबाक टिप्पणी की और अपनी कमियों को भी नहीं छिपाया. उन्होंने कहा कि हमारे छात्र कई प्रकार की विपरित परिस्थितियों के बावजूद प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते रहे हैं और यह उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ निश्चिय से ही संभव हो पाता है. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान हमारे बच्चों से है और ऐसे बच्चों को मैं बधाईयों के साथ-साथ शुभकामनायें देता हूँ. उन्होंने कहा कि हमारा विश्वास हमेशा विकासात्मक सोच के साथ सकारात्मक दिशा में तत्परता के साथ आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सामने में कई चुनौतियां है. हमारे पास संसाधनों का अभाव है. पर्याप्त शिक्षक नहीं है, यहां तक की तृतीय एवं चतुर्थवर्गीय कर्मियों की कमी है. पर विवशता यह है कि विश्वविद्यालय अपने स्तर से इन कमियों को दूर नहीं कर सकता. कुलपति ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों के इतिहास में पहली बार केन्द्रीयकृत आॅन लाईन नामांकन की प्रक्रिया के माध्यम से 43 अंगीभूत एवं 28 सम्बद्ध महाविद्यालयों में नामांकन की शुरूआत की गई है. उन्होंने कहा कि छात्रहित में अपलीकेशन से लेकर रिजल्ट पब्लिकेशन तक सारी प्रक्रिया डिजिटल होगी और पूर्णतया आॅटोमेशन के क्षेत्र में यह पहला कदम है. स्नातक के वर्त्तमान सत्र में 1 लाख 23 हजार 857 छात्रों ने आवेदन किया है, जो आधुनिकीकरण की सोंच को परिलक्षित कर रहा है. यह उपलब्धि प्रसंसनीय है. नैक संबंधित चर्चा करते हुए कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय सहित 19 अंगीभूत महाविद्यालयों एवं एक सम्बद्ध महाविद्यालयों का नैक मुल्यांकन हो चुका है. उन्होंने कहा कि एलएनएमयू बिहार प्रदेश का एक मात्र विश्वविद्यालय है. जिसे रूसा के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में 20 करोड़ रूपये का अनुदान प्राप्त हुआ. साथ ही 11 अंगीभूत महाविद्यालयों में 2 करोड़ की दर से रूसा से अनुदान प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि राज्य में यह पहला विश्वविद्यालय है जिसने राज्यभवन के निदेशानुसार सीबीसीएस पद्धति के सभी विषयों का सिलेवश तैयार कर लिया है. इतना ही नहीं विश्वविद्यालय में पहली बार सभी शिक्षकों, कर्मियों और छात्रों की उपस्थिति बायोमैट्रिक सिस्टम से दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है. उन्होंने कहा कि एनआईसीईआर, नई दिल्ली और विश्वविद्यालय के बीच एमओयू पर सहमति बनी है और शीघ्र ही दूरस्थ मोड में कोर्सेज शुरू किया जायेगा. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मई को विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नया इतिहास जोड़ा, जिसके तहत सेन्टर आॅफ एडवांस रिसर्च इन नैनो साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी का उद्घाटन किया. देश का यह 15वाँ और राज्य का पहला विश्वविद्यालय बन गया. उन्होंने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, डब्लुआईटी और एमबीए की उपलब्धताओं की चर्चा की. साथ ही कमिटियों का पुनर्गठन सहित कई बिन्दुओं पर प्रकाश डाला. समाचार लिखे जाने तक कार्यक्रम जारी था. कार्यक्रम की शुरूआत में मंचासीन लोगों में प्रति-कुलपति प्रो. सैयद मुमताजुद्दीन, विधायक संजय सरावगी, पूर्व विधान पार्षद प्रो. विनोद कुमार चौधरी, कुलसचिव डॉ. अजीत कुमार सिंह शामिल थे. वहीं संबोधन करने वालों में विधायक सरावगी, डीएसडब्लु डॉ. के.पी. सिन्हा, प्रधानाचार्य डॉ. सत्यनारायण पासवान, डॉ. रहमतुल्लाह, प्रो. जितेन्द्र नारायण, डॉ. पुष्पम नारायण, डॉ. वैशाली, इंजीनियर उत्कर्ष कुशवाहा और कर्मचारी नेता दशरथ यादव शामिल थे.

