
गरीबों केलिए भी चिकित्सा का बेहतरीन विकल्प है सरकारी देशी चिकित्सालय।

दरभंगा । अभिषेक कुमार
जागरूकता के अभाव मे गरीब-गुरबों को इलाज के वास्ते निजी नर्सिंग होमो या फिर सरकारी अस्पताल मे एलोपैथी इलाज़ करवाना पड़ता है जबकि राज्य सरकार ने देशी चिकित्सालय खोल रखा है । देशी चिकित्सा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका सेवन करने से दवाईयों का दुष्प्रभाव नही होता है। जबकि एलोपैथी इलाज़ मे दवाओं का दुष्प्रभाव भी पड़ता है । इलाज़ के नाम पर काफी पैसे भी खर्च होते हैं। राज्य सरकार ने देशी चिकित्सालय खोल कर आमलोगों को सस्ता और बेहतर इलाज़ करवाने की व्यवस्था तो कर दी लेकिन जागरूकता के अभाव मे देशी चिकित्सालय पर इक्के दुक्के मरीज ही पहुँच पा रहे हैं ।लहेरियासराय के बाबूसाहेब कॉलोनी स्थित जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय के प्रभारी डा0 शैलेंद्र कुमार पाठक ने वॉइस ऑफ़ दरभंगा से एक ख़ास मुलाक़ात मे बताया कि देशी चिकित्सालय मे तीन पद्धति से मरीजों का इलाज़ होता है। इन तीन पद्धतियों मे आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक एवं यूनानी पद्धती शामिल है । मरीजों को मुफ्त मे दवा भी उपलब्ध कारवायी जाती है । अस्पताल के संबंध मे बताया कि वर्तमान मे दो नियमित, एक प्रतिनियुक्ति पर चिकित्सक उपलब्ध हैं। इसके अलावे एक लिपिक, आशुलिपिक एवं आदेशपाल सहित दो कंपाउंडर कार्यरत हैं । डा0 पाठक ने बताया कि जिले मे सात देशी औषधालय खुले हुए हैं जिसमे तीन आयुर्वेदिक, दो होमियोपैथिक एवं दो यूनानी अस्पताल हैं । आयुर्वेदिक अस्पताल बेनीपुर अंतर्गत बाथो, मनीगाछी अंतर्गत माउबिहट, कुशेश्वरस्थान अंतर्गत उजुआ मे है। होमियोपैथी चिकित्सालय मनीगाछी के बघांत मे एवं बिरौल के पडरी गाँव मे चल रहा है। इसी तरह यूनानी चिकित्सालय सिंघवाड़ा अंतर्गत अलीमबाद निमरौली एवं मालपट्टी मे चल रहा है । वॉइस ऑफ़ दरभंगा से उन्होने कहा कि लोगो मे जागरूकता लाने केलिए जल्द ही जगह जगह कैंप लगाया जाएगा और सरकार के उद्देश्यों से आमजनों को परिचित करवाया जाएगा।

