Home Featured पीड़िता को इंसाफ की जगह इंतज़ार, मदद करने वाले कार्यकर्ता पर दर्ज हुआ केस।

पीड़िता को इंसाफ की जगह इंतज़ार, मदद करने वाले कार्यकर्ता पर दर्ज हुआ केस।

दरभंगा: कमतौल थाना क्षेत्र के बाजिदपुर गांव में एक विवाहित महिला के साथ दुष्कर्म और अपहरण के प्रयास का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी शिबली नोमानी ने 11 जुलाई की रात करीब 9:30 बजे घटना को अंजाम देने की कोशिश की। पीड़िता अत्यंत गरीब है और दो वर्षीय बच्ची के साथ अकेले रहती है।

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गंभीर आरोप यह भी है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पीड़ित परिवार को थाने के कई चक्कर काटने पड़े, लेकिन थाना प्रभारी की ओर से लगातार टालमटोल की गई। इतना ही नहीं, पीड़िता की मदद कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता आमिर काजमी के खिलाफ भी कथित तौर पर झूठा जवाबी मुकदमा दर्ज कर उन्हें डराने की कोशिश की गई।

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पीड़िता के पति ने 12 जुलाई को सामाजिक कार्यकर्ता आमिर काजमी से संपर्क कर मामले को थाने में दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन थाना प्रभारी ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया। 14 जुलाई को पीड़ित दंपती ने एसएसपी से मिलकर घटना की जानकारी दी, जिसके बाद एसएसपी ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, परंतु 15 और 16 जुलाई को भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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17 जुलाई को जब पीड़ित परिवार और आमिर काजमी दोपहर 1:10 बजे फिर से थाने पहुंचे, तो उन्हें रात 8 बजे तक बिना खाना-पानी के बिठाए रखा गया और अंत में कहा गया कि “कल आइए।” काजमी ने पुलिस को महिलाओं के लिए कानूनी प्रावधानों (धारा 166ए बीएनएस) की जानकारी भी दी, लेकिन फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बाद में दबाव बढ़ने पर पुलिस ने आनन-फानन में प्राथमिकी दर्ज की।

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19 जुलाई को जब काजमी से बयान लिया जाना था, तब उन्हें बताया गया कि अभियुक्त ने उनके खिलाफ काउंटर केस दर्ज कराया है। आमिर काजमी ने इसे पूरी तरह झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि वह सिर्फ एक गरीब महिला की मदद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे वर्षों से आरटीआई कार्यकर्ता और सामाजिक सरोकारों के लिए काम कर रहे हैं तथा जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उनकी साख है।

काजमी ने पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री कार्यालय और एसएसपी को पत्र भेजकर मांग की है कि थाना प्रभारी के खिलाफ एसएसपी के आदेश की अवहेलना (धारा 166ए बीएनएस) के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी — महिला सेल या सीआईडी — से करवाई जाए, पीड़िता और गवाहों को सुरक्षा दी जाए तथा उनके विरुद्ध दर्ज झूठे काउंटर केस को खारिज किया जाए।

उन्होंने कमतौल थाना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि थाने में दलाली चरम पर है और सामान्य जनता को इंसाफ मिलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि थाने में मामला दर्ज करवाने के लिए पत्रकारों और दलालों के माध्यम से ही काम होता है।

इस पूरे प्रकरण पर एसडीपीओ सदर-2 शुभेन्द्र कुमार सुमन ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने थाना प्रभारी को फटकार लगाई है और खुद कमतौल थाना में 4 घंटे बैठकर जनसमस्याएं सुनने की बात कही है।

यह मामला न केवल पुलिसिया लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कमजोर और वंचित वर्ग के लिए न्याय की राह कितनी कठिन है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करता है।

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