
मृद्भांड संरक्षण पर एक दिवसीय व्याख्यान आयोजित।
दरभंगा: मिथिला विवि के प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग की ओर से बुधवार को मृद्भांडावशेषों का रखरखाव विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। अध्यक्षता इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार झा ने की। मुख्य वक्ता सह मुख्य अतिथि एमएलएसएम कॉलेज, दरभंगा के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर नाथ ठाकुर थे।

वक्ता के रूप में विभागीय शोधार्थी मुरारी कुमार झा ने विचार रखे। अपने वक्तव्य में मुरारी कुमार झा ने कहा कि मृद्भांडावशेष ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य हैं। इन्हें नमी, धूल, दूषित हवा और मानवीय असावधानी से होने वाले क्षरण से बचाना आवश्यक है।

इसके लिए सिलिका जेल, सूखे कोयले और उचित स्थान पर संरक्षित कर इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। मुख्य अतिथि डॉ. ठाकुर ने कहा कि इतिहास का अध्ययन अन्वेषण और विश्लेषण पर आधारित है।

लोक संस्कृति भी इतिहास का प्रमुख स्रोत है और मृद्भांड उसका प्रारंभिक पुरातात्विक आधार। उन्होंने कहा कि हर पुरावशेष की अपनी प्रकृति होती है, जिसे समझकर ही उपयुक्त संरक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है। प्रो. झा ने मृद्भांडों को सांस्कृतिक निरंतरता और तकनीकी कौशल का सजीव प्रतीक बताते हुए इसके वैज्ञानिक संरक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम के उपरांत महावीर केवल फाउंडेशन, मुंबई की ओर से विभाग को राजस्थान के मकराना मार्बल से निर्मित जैन तीर्थंकर महावीर स्वामी की प्रतिमा की प्रतिकृति भेंट की गई, जिसे शोधार्थी मुरारी कुमार झा ने विभाग को सौंपा।


