
ढ़ाई साल में पहली बार दिन भर विश्वविद्यालय में रही तालाबंदी। Voice of Darbhanga

दरभंगा : कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा के ढ़ाई साल से अधिक के कार्यकाल में जो नहीं हुआ था वह आज देखने को मिला. कुलपति न्यायिक कार्य से मुख्यालय से बाहर है. इसका असर भी विश्वविद्यालय में देखने को मिला. मिथिला की कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो गई कि कुलपति बिना सबकुछ सुना. आज ऐसा लग रहा था कि विश्वविद्यालय अधिकारीविहीन है. यहां तक कहे कि यहां के अधिकारी आज बिग जीरो की भूमिका में थे. हुआ यूं कि वामपंथी छात्र संगठन का आंदोलन विश्वविद्यालय के धरनास्थल पर चल रहा है. संगठन से जुड़े छात्र भूख हड़ताल पर है. लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी कि आज विश्वविद्यालय को बंद करा दिया जायेगा. कुलपति प्रो. कुशवाहा न्यायिक कार्य से पटना गये हुए हैं. इधर छात्र संगठनों ने आज प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय को बंद करा दिया. सबसे बड़ी बात है कि पूरे दिन विश्वविद्यालय बंद रहा और कोई काम-काज नहीं हुआ, जबकि कुलानुशासक से लेकर सारे अधिकारी परिसर में ही थे. भारी संख्या में निजी सुरक्षा बल भी तैनात था. इसके अलावे पुलिस प्रशासन की मौजूदगी भी अच्छी संख्या में थी. फिर भी विश्वविद्यालय में ताला तक नहीं खुला. जबकि आंदोलनकारी छात्रों की संख्या निजी सुरक्षा एजेंसी से भी कम थी. चर्चा तो इस बात की थी कि कुछ अधिकारी भी चाहते थे कि बंद पूरी तरह सफल हो. हलांकि इस चर्चा में कितनी सच्चाई है यह कहना कठिन है. लेकिन आज की घटना ने साबित कर दिया कि कुलपति ने अपने सहयोग के लिए अधिकारियों की जो फौज कायम कर रखी है वे कितने कारगर है. वैसे यह भी सच्चाई है कि बड़े से बड़े आंदोलन की घोषणा हुई थी. लेकिन एक प्रो. साकेत कुशवाहा के मुख्यालय में मौजूद रहने के कारण पिछले ढ़ाई सालों में विश्वविद्यालय का कार्य बाधित नहीं हुआ. पर आज पूरे दिन विश्वविद्यालय ठप रहा.

