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मुख्य - September 13, 2016

कुलपति के निर्णय से स्रातक में नामांकन का हुआ मार्ग प्रशस्त। Voice of Darbhanga

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दरभंगा। ए जिलानी

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा की अध्यक्षता में नामांकन समिति की आज हुई बैठक में नामांकन से जुड़ी सभी समस्याओं का आॅन स्पॉट निर्णय लिया गया है. अब छात्रों को नामांकन के लिए विश्वविद्यालय नहीं आना पड़ेगा. कुलपति प्रो. कुशवाहा की अध्यक्षता में आज नामांकन समिति की बैठक में प्रति-कुलपति प्रो. सैयद मुमताजुद्दीन, प्रभारी कुलसचिव डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन, विकास पदाधिकारी डॉ. के.के. साहु, परीक्षा नियंत्रक डॉ. कुलानन्द यादव, महाविद्यालय निरीक्षक विज्ञान डॉ. अजीत कुमार चौधरी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे. बैठक में निर्णय लिया गया कि अब अंगीभूत एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों में स्रातक में नामांकन को लेकर जो भी समस्या होगा, उसका निदान प्रधानाचार्य स्तर से ही कर दिया जायेगा. प्रथम सूची में जिन छात्रों का नाम है और किसी कारण या त्रुटि के चलते नामांकन नहीं लिया है और विश्वविद्यालय में सुधार के लिए आवेदन दे चुके हैं वे सीधे चलान लेकर संबंधित महाविद्यालय जायेंगे और प्रतिष्ठा के विषय को छोड़कर अन्य में संशोधन कराकर नामांकन करा लेंगे. अगर प्रतिष्ठा के बदले पास कोर्स में नाम है और उन्हें प्रतिष्ठा का अंक है, तो सीट के उपलब्धता पर मेरिट के आधार पर प्रधानाचार्य नामांकन ले लेंगे. इतना ही नहीं जिन छात्र-छात्राओं ने आॅन लाईन आवेदन किया है, पर अंक कम रहने के कारण उनका नामांकन नहीं हो सका या फिर लिस्ट में नाम नहीं है, वैसे छात्र-छात्रा सीट उपलब्ध रहने पर 26 से 30 सितम्बर तक फस्ट कम फस्ट के आधार पर ऐच्छिक महाविद्यालय में नामांकन ले सकते हैं. इतना ही नहीं जिन छात्रों ने किसी कारणवश नामांकन के लिए आवेदन नहीं दिया है वे 28 सितम्बर तक सीट उपलब्धता के आधार पर आॅन लाईन आवेदन दे सकते हैं और इनकी घोषणा बाद में की जा सकेगी. इतना ही नहीं जो लोग भूगोल प्रतिष्ठा में नामांकन लिया है और वे विज्ञान के छात्र है, तो संबंधित प्रधानाचार्य सीट की उपलब्धता के आधार पर उनका नामांकन संबंधित ऐच्छिक प्रतिष्ठा विषय में लेंगे. विश्वविद्यालय प्रशासन के आज के निर्णय से छात्रों के नामांकन की समस्या का समाधान होता नजर आ रहा है. इसी बीच ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महासचिव डॉ. अजीत कुमार चौधरी ने कुलपति द्वारा आॅन स्पॉट फैसला लेने के निर्णय का स्वागत किया है.

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