
प्रदीप झा की पुण्यतिथि पर परिवार वालो ने कांग्रेसी नेताओं पर ही उठाये गम्भीर सवाल! Voice of Darbhanga

दरभंगा: यूवा कांग्रेस के पूर्व दरभंगा लोकसभा अध्यक्ष स्व0 प्रदीप झा की प्रतिमा के समक्ष शनिवार को लहटा गांव में चौथा शहादत दिवस पं. कुलानंद झा के अध्यझता में मनाया गया। स्वर्गीय प्रदीप झा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद प्रो. हरेकृष्ण चौधरी ने कहा कि जो व्यक्ति परिवार, समाज, क्षेत्र या देश हित के लिए काम करता है उसका नाम सदा जीवित रहता है। प्रदीप झा के हत्या से न केवल लहटा गाम या मिथलांचल बल्कि कांग्रेस परिवार की क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन के द्वारा किसी निष्कर्ष पर न पहुंचना अपने आप में संदेह व्यक्त करता है। अन्य उपस्थित व्यक्ति ने एक स्वर में इस हत्या की निंदा करते हुए कहा क़ि अभी तक निष्पक्ष जाँच न होना तथा दोषी को सजा नहीं मिलना दुःखद है। ज्ञात रहे कि प्रदीप झा 2010 में दरभंगा लोकसभा यूवा कांग्रेस का अध्यक्ष अपने प्रतिद्वन्दी राजस्व मंत्री के समर्थित उम्मीदवार रतिकांत झा को हराकर निर्वाचित हुए तथा 2010 के बिहार विधान सभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी का दावा मदन मोहन झा के विरुद्ध किया था। स्व0 झा की हत्या 8 अक्टूबर 2012 को जब वह दरभंगा जिला कांग्रेस मुख्यलय से लौट रहा था तो एक साजिश के तहत कर दिया गया था। हत्या की प्राथमिकता विभूति झा पर बहेरा थाना के अन्तर्गत दर्ज किया गया जिसका केस न. 291/12 है। विभूति झा एक साल तक पुलिस के गिरफ्त में नहीं आया जो यह दर्शता है की प्रशासन कहीँ न कहीँ दवाव में और निष्पझ रूप से काम नहीँ कर रहा था। इस हत्या का चार साल बीत चुका है लेकिन अभी तक न्यायलय में केस नहीँ खुला है जो अपने आप में न्याय प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। आखिर न्याय सिर्फ अमीर के लिए है, इस संदर्भ में बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर का यह कथन सत्य प्रतीत होता है कि किसी भी संघर्ष में जिनके हाथ में सामर्थ्य होती है, उन्हीं के हाथ में विजय होती है, जिनके सामर्थ्य नहीँ उन्हें अपने विजय की उपेक्षा रखना फिजूल की बकवास है। इस संदर्भ में स्व. झा के पिता पं. कामेश्वर झा ने कहा कि मैं 1979 से कांग्रेस की सेवा करते रहे हैं लेकिन दुःख इस बात का है कि उनके जवान पुत्र की हत्या के बाद न तो प्रशासन ने कुछ किया न ही पार्टी स्तर पर कोई सहयोग किया गया जबकि मदन मोहन झा कांग्रेस पार्टी से कवीना मंत्री है। वहीँ प्रदीप झा के भाई संतोष झा जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतराष्ट्रीय संस्थान से शोधार्थी है का कहना है कि हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश था। प्रदीप झा के बढ़ते राजनीतिक कद के कारण दरभंगा के वरिष्ठ कांग्रेसी ने एक साज़िश के तहत हत्या करवा दिया। संतोष अपना विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि क्या एक आम आदमी के लिए राजनीति करना जूर्म है। उन्होंने सीधे राजस्व मंत्री झा पर आरोप लगाते हुए कहा कि हत्या के बाद मंत्री जी ने किसी भी प्रकार के मदद नहीँ किया। इसकी क्या वजह है कहीँ इसके पीछे उन्हीं का हाथ तो नहीँ जवकि मंत्री जी ने विभूति झा को जिला कांग्रेस का महासचिव नियुक्त करवा दिया है जो इस हत्या के आरोपी है। स्व. झा के चौथे शहादत दिवस पर किसी भी कांग्रेसी नेता को परिवार द्वारा न बुलाना कांग्रेस के प्रति नाराजगी साफ झलक रहा था। जबकि पिछले तीनों शहादत दिवस पर कांग्रेस के नेता उपस्थित थे। गांव के बच्चा- बच्चा मौजूद था जिनके चेहरे पर फिर से ग़मों की वही लकीर थी जो 4 वर्ष पूर्व (8 अक्टूबर) स्व. झा की शव को गांव पहुँचने के बाद दिखी थी।
उपस्थित अन्य सदस्यों में संजय झा फ्रेंड्स क्लब के संरक्षक अरुण झा, संस्कृत शिक्षक संघ के जिला मंत्री वेदानंद झा, विश्वनाथ झा, सोनू मिश्रा, समीर झा, मुरारी झा, राजेश झा, अनिल वर्मा, आदित्य नाथ ठाकुर, बलराम झा, रंजीत झा, आदि लोग प्रमुख थे।

